फर्जी पेंशनरों से होगी धन की वसूली

Haridwar Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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हरिद्वार। समाज कल्याण विभाग से वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग पेंशन ले रहे अपात्र लोगों की खैर नहीं है। उन लोगों से न केवल पेेंशन की वसूली होगी बल्कि जाली दस्तावेज दाखिल कर पेंशन बनवाने वालों के विरुद्ध एफआईआर (मुकदमा) भी दर्ज कराई जाएगी। जाली दस्तावेजों का सत्यापन करने वाले लेखपालों और अपात्रों की संस्तुति करने वाले जनप्रतिनिधियों की भी खैर नहीं है। उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकती है।
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मुख्य विकास अधिकारी वीएस धनिक ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जानेे के संकेत दिए हैं। कहा कि पहली बार वृद्धावस्था, विधवा तथा विकलांग पेंशनरों का भौतिक सत्यापन जिले के सीनियर अधिकारियों की देखरेख में पूरी पारदर्शिता से कराया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में नगर निगम और नगरपालिका के कर्मचारियों को घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन के कार्य में लगाया गया है। समाज कल्याण विभाग पहले भौतिक सत्यापन का कार्य खुद कराता था। पटवारी भी सत्यापन करते थे लेकिन इस बार नगर निगम कर्मियों द्वारा किए जा रहे पेंशनरों के भौतिक सत्यापन में सबकी पोल खुलने जा रही है। हरिद्वार क्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट जीवन सिंह नागन्याल और ज्वालापुर क्षेत्र में उप जिलाधिकारी अरविंद पांडेय नोडल अधिकारी के रूप में सत्यापन का कार्य देख रहे हैं। नगर निगम के 30 कर्मचारी आजकल घर-घर जाकर पेंशनरों को सत्यापन कर रहे हैं।


भौतिक सत्यापन में छूट रहे पसीने
निगम कर्मियों को समाज कल्याण विभाग के शहरी क्षेत्र के पेंशनरों के भौतिक सत्यापन में ठंड में भी पसीने छूट रहे हैं। समाज कल्याण विभाग ने भौतिक सत्यापन के लिए जो सूची उपलब्ध कराई हैं, उनमें पेंशनधारी का पूरा पता नहीं दिया गया है।
सूची में एक नाम भीमगोडा का है तो दूसरा नाम ज्वालापुर का और तीसरा नाम कनखल का है। पात्र का नाम लिखकर पते के स्थान पर भीमगोडा, भूपतवाला, कनखल, कृष्णानगर, ज्वालापुर लिखा गया है। इससे पेंशनर का पता लगाने में कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। ज्वालापुर और कनखल ऐसे क्षेत्र हैं, जहां लाखों लोग रहते हैं। जब तक कालोनी और मकान का सही नंबर कर्मचारियों के पास नहीं है तो उन्हें पेंशनर्स तक पहुंचने में दिक्कत होगी ही। नगर निगम के एक कर्मचारी को औसतन 132 पेंशनर्स की सूची दी गई है। भौतिक सत्यापन के लिए 19 जनवरी तक डेडलाइन तय की गई थी लेकिन सही और पूरे पते नहीं होने के चलते निर्धारित तिथि तक काम पूरा नहीं हो सका है। नगर निगम के कर्मचारी अब भी सत्यापन अभियान में जुटे हैं।

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