गणतंत्र के ये कैसे गण और तंत्र

Haridwar Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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हरिद्वार। आज से 64 साल पहले देश में संविधान लागू करके गणतंत्र की घोषणा की गई थी लेकिन आज गण को तंत्र के तिकड़म ने त्रस्त कर दिया है। कुछ लोगों की शर्मनाक हरकतों से लहूलुहान होकर गणतंत्र की मूल भावना दर्द से कराह रही है। अंग्रेेजों से मुक्ति के बाद उम्मीद की गई थी कि देश में संविधान के अनुसार कार्य किए जाएंगे। कानून बनाने वाले से लेकर पालन करानेे और करने वाले संवैधानिक दायरे में रहेंगे। अफसोस की ऐसा नहीं हो पा रहा है। कुछ कानून बनाने वाले ही कानून का पालन नहीं कर रहे हैं। कानून का पालन कराने वाले भी दायित्व को नहीं निभा रहे हैं। ऐसे में कानून का पालन करने वाले तो अपने दायरे को लांघेंगे ही।
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हरिद्वार जिले में आजकल गणतंत्र आहत है। छह जनवरी को सत्ताधारी कांग्रेस के विधायक प्रदीप बत्रा के समर्थकों ने सिंचाई विभाग के एक आवास पर कब्जा कर लिया। विभाग के अधिकारियों ने विरोध किया तो देख लेने की धमकी दी गई। इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को तरहरीर दी तो बजाए इस पर कार्रवाई करने के पुलिस ने तहरीर मिलने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी भी सुस्त हो गए। उन्होंने पुलिस में विधायक के खिलाफ दोबारा तहरीर नहीं दी। प्रदेश भर मेें यह मामला चर्चा में है, लेकिन पुलिस के आला अधिकारी डीआईजी संजय गुंज्याल का कहना है कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की गई है। शिकायत मिलने पर गौर किया जाएगा। उधर जिन्हें यह आवास मिलना चाहिए था वे किराये के मकान में रहने को विवश हैं।

इस मामले में जहां कानून बनाने वाले ने कानून को तोड़ा वहीं कानून का पालन कराने वाली पुलिस ने अपने दायित्व को नहीं निभाया। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी कानून का पालन करने की कोई कोशिश नहीं की। जिन्हें यह मकान मिलना चाहिए था उन लोगों ने भी कानून के दायरे में रहकर कोई कदम नहीं उठाया। संविधान लागू करने वालों ने अपने गण और तंत्र से तो ऐसी कल्पना नहीं की होगी।

ये कैसा संविधान निभा रहे हैं बसपा विधायक
हरिद्वार। विधायक और मंत्री बनते समय जिस जनता की सेवा की शपथ खाई थी, जिस संविधान का वास्ता लिया था, आज उसे भूल गए हैं जिले के तीनों बसपा विधायक। यदि ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस विधायक की दबंगई पर वह आंखें मूंदकर बैठे नहीं रहते।
बसपा कोटे से कैबिनेट मंत्री बने भगवानपुर विधायक सुरेंद्र राकेश से जब कांग्रेस के रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा की ओर से सिंचाई विभाग के कब्जे की बाबत पूछा गया तो कहा कि प्रदीप बत्रा ने कब्जा कहां किया है। उन्हें तो सिंचाई मंत्री ने आवास आवंटित किया है। आवास आवंटित कराकर तो अनेक लोग रह रहे हैं। बसपा कोटे से मंत्री का दर्जा पा चुके और मंगलौर से पहली बार विधायक बने सरवत करीम अंसारी ने तो इस मामले पर बोलने से ही मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इस पर कोई कमेंट ही नहीं करना चाहते। बसपा के तीसरे नुमांइदे झबरेड़ा विधायक हरिदास को भी सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर खुश कर दिया है। हरिदास से जब फोन पर कब्जा प्रकरण की बाबत पूछा गया तो फोन ही काट दिया। ऐसा दो बार हुआ। जाहिर है कि विधायक इस पर कुछ बोलना नहीं चाहते।
भाजपा विधायक बोले-अवैध कब्जा करने वाले दंडित हों
- राज्य सरकार को चाहिए कि 26 जनवरी के दिन सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर असंवैधानिक काम करने वाले विधायक प्रदीप बत्रा को दंडित करे। अगर ऐसा नहीं होता है तो माना जाएगा कि सरकार का संविधान में विश्वास नहीं है।
- स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक हरिद्वार ग्रामीण
- सिंचाई विभाग के कर्मचारी आवास के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं और एक विधायक असंवैधानिक तरीके से आवास कब्जाकर बैठ गए हैं। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है। कानून के अनुसार प्रदीप बत्रा के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
- आदेश चौहान, विधायक रानीपुर
- कांग्रेस के एक विधायक के कारनामे के चलते सरकार की बदनामी हो रही है लेकिन सरकार की चुप्पी समझ से परे है। पूरी सरकार एक विधायक के अवैध काम को वैध करने में जुटी है। विधानसभा में सरकार को इसका जवाब देना होगा।
- संजय गुप्ता, विधायक लक्सर
- रुड़की विधायक ने अगर बिना आवंटन सिंचाई विभाग के आवास में रहना शुरू कर दिया है तो यह गलत है। विधायक को पहले आवास का आवंटन कराना चाहिए था। अगर आवंटन नहीं हुआ है तो उन्हें स्वयं पहल करते हुए आवास खाली कर देना चाहिए।
- मदन कौशिक, विधायक हरिद्वार
- प्रदीप बत्रा कांग्रेस के विधायक हैं, उन्हें वैधानिक तरीके से आवंटन कराना चाहिए था। उनकी ओर से आवास पर कब्जा किया जाना गलत है। एक जिम्मेदार आदमी के लिए यह शोभा नहीं देता। जनप्रतिनिधि का जीवन तो दूसरों के लिए आदर्श होना चाहिए।
- चंद्रशेखर भट्टेवाले, विधायक ज्वालापुर
कौन दबाकर बैठ गया कब्जों की जांच
सिंचाई विभाग की ओर से बताया गया कि उन्होंने विभागीय आवासों पर कब्जों की सूची हरिद्वार जिला प्रशासन को सौंप दी है। जबकि जिलाधिकारी सचिन कुर्वे का कहना है कि उन्हें कोई सूची मिली ही नहीं है। सवाल उठता है कि आखिर सूची को कौन दबाकर बैठ गया है। मामला चूंकि सत्ताधारी दल के विधायक से जुड़ा है इसलिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों के यह कहने के बावजूद की उन्होंने विभाग के आवासों पर अवैध ढंग से काबिज 90 लोगों की सूची जिला प्रशासन को भेज दी है, से जिला प्रशासन इनकार कर रहा है।

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