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बारह केंद्र बांटेंगे गंगा पर तकनीकी ज्ञान

Haridwar Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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हरिद्वार। महामना मालवीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दी गंगा मैनेजमेंट (एमएमआईटीजीएम) अब वाराणसी से बाहर अपनी शाखाएं खोलेगा। ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे बसे शहरों में एमएमआईटीजीएम के 12 केंद्र खोले जाएंगे। उत्तराखंड में ऋषिकेश, हरिद्वार और रुड़की में केंद्र संचालित होंगे। गैर सरकारी रूप से संचालित इन केंद्रों का उद्देश्य गंगा नदी पर तकनीकी ज्ञान की जानकारी देना होगा।
हरिद्वार आए महामना मालवीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दी गंगा मैनेजमेंट के संस्थापक और बीएचयू के रिटायर प्रो. यूके चौधरी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि गंगा को बचाने की चाहत रखने वाले बहुत हैं, लेकिन इससे समस्या का हल नहीं निकल रहा है। अमृत रूपी गंगा जल प्रदूषित होकर विष होता जा रहा है। खनन, बांध, नहरें जैसी अन्य कई समस्याओं से भी गंगा घिरी है। हर स्तर पर गंगा के तकनीकी ज्ञान का अभाव होना इन कठिन समस्याओं का कारण है। गंगा को बचाने के उद्देश्य से वाराणसी में आठ मई 2010 को महामना मालवीय इंस्टीट्यूट फॉर दी गंगा मैनेजमेंट का गठन किया गया। इस इंस्टीट्यूट से बच्चों, छात्रों, किसानों, नौकरशाहों, शिक्षाविदों, गृहणियों, संतों और समाज से अन्य वर्ग के लोगों को जोड़ा गया है।

यहां खुलने हैं केन्द्र
प्रो. चौधरी ने बताया कि गंगा नदी के किनारे बसे ऋषिकेश, हरिद्वार, नरोड़ा, कानपुर, इलाहाबाद, पटना, भागलपुर, कोलकाता में स्थान चयनित किए जा चुके हैं। रुड़की भी प्रस्तावित है। बाकी तीन केंद्रों के लिए स्थान चयनित किए जा रहे हैं।

केंद्रों का उद्देश्य
इस गैर सरकारी इंस्टीट्यूटी के देशभर में खोले जाने वाले बारह केंद्रों का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को समृद्ध बनाते हुए मौलिक स्वरूप में कायम रखना है। इसके लिए लोगों को गंगा विज्ञान एवं वातावरण के संतुलित व्यवस्था की जानकारी, कंप्यूटर एवं रिमोट सेंसिंग, मॉडल एवं गंगा में जाकर ट्रेनिंग दी जाएगी। स्कूल-कालेजों में सेमीनार, सेम्पूजिया, व्याख्यान और जानकारी परक पुस्तकों के माध्यम से मौलिक ज्ञान देना है। साथ ही गंगाजल टेस्टिंग की सुविधा भी इन केंद्रों पर मिलेगी।

विशेषज्ञों की जुटेगी टीम
इंस्टीट्यूटी की साइंटफिक कोर कमेटी में बीएचयू, आईआईटी रुड़की, कानपुर, खड़गपुर, दिल्ली, मुंबई, एनआईटी राउरकेला के 19 वैज्ञानिक शामिल हैं। 12 केंद्रों के संचालन के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई जा रही है। जिसमें कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों रिटायर प्रोफेसर, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक शामिल होंगे। हरिद्वार और रुड़की में इंस्टीट्यूटी की शाखा के संचालन का जिम्मा केएलडीएवी पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. बीएल अग्रवाल को दिया गया है।

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