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हरिद्वार में गंगा में खनन से पहाड़ भी प्रभावित

Haridwar Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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हरिद्वार। हरिद्वार में गंगा में हो रहे खनन से पहाड़ भी प्रभावित हो रहे हैं। गंगा में खनन शरीर के किसी हिस्से में जख्म होने के समान है, जिसका संक्रमण पूरे शरीर में हो जाता है। यह कहना है कि महामना मालवीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दी गंगा मैनेजमेंट के संस्थापक एवं बीएचयू के रिटायर प्रो. यूसी चौधरी का।
खनन बंदी की मांग को लेकर हरिद्वार में चल रहे आंदोलन को समर्थन देेने आए प्रो. यूसी चौधरी शुक्रवार दोपहर पत्रकारों से मुखातिब हुए। पिछले 35 साल से रिवर मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर रहे प्रो. चौधरी ने गंगा में अंधाधुंध खनन पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि बिना तकनीकी आधार के गंगा में खनन प्रकृति के साथ बड़ी छेड़छाड़ है। हरिद्वार सहित जहां भी गंगा में खनन हो रहा है उसका हिमालय से लेकर मैदान तक व्यापक असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि खनन से खुदी सतह की भरपाई नदी पहाड़ों से करती है। इसी वजह से पहाड़ों में भूस्खलन होते हैं। इसका प्रभाव भूजल पर भी पड़ता है। नदी की प्रोफाइल बदल जाती है। नदी धारा से भटक जाती है। जिसका परिणाम बाढ़ के रूप में सामने आता है।
अपनी पुस्तक ‘गंगा और मानव शरीर में जीवन समानताएं’ का हवाला देते हुए प्रो. चौधरी ने बताया कि यह पुस्तक वैज्ञानिक आधार पर लिखी गई है। गंगा में खनन मानव शरीर में होने वाले घाव की तरह है, जिसके दर्द से पूरा शरीर प्रभावित हो जाता है। कई घाव दिमाग पर भी असर करते हैं। पैर में हुए घाव को भरने की प्रक्रिया में जिस तरह पूरा शरीर प्रभावित होता है, वही बात पर्यावरणीय आधार पर गंगा नदी पर भी लागू होती है। उन्होंने गंगा में खनन बंदी की मांग उठाई। बताया कि वर्ष 2008 में गठित राष्ट्रीय नदी गंगा बेसिन प्राधिकरण को उन्होंने 32 पेज का सुझाव दिया लेकिन प्राधिकरण उनमें से एक पर भी संज्ञान नहीं लिया।
गंगा में खनन मानव शरीर में होने वाले घाव की तरह है, जिसके दर्द से पूरा शरीर प्रभावित हो जाता है। कई घाव दिमाग पर भी असर करते हैं। पैर में हुए घाव को भरने की प्रक्रिया में जिस तरह पूरा शरीर प्रभावित होता है, वही बात पर्यावरणीय आधार पर गंगा नदी पर भी लागू होती है।
- प्रो. यूसी चौधरी, महामना मालवीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दी गंगा मैनेजमेंट के संस्थापक



खनन बंदी तक जारी रहेगा क्रमिक अनशन
हरिद्वार। गंगा में खनन बंदी की मांग को लेकर चल रहे मातृ सदन के आंदोलन के समर्थन में चंद्राचार्य चौक पर चल रहा स्थानीय लोगों का क्रमिक अनशन दसवें दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को क्रमिक अनशन पर अमजद अली बैठे। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब तक सरकार खनन को पूर्ण रूप से बंद नहीं करेगी तब तक धरना जारी रहेगा। इस दौरान बनारस विश्वविद्यालय के प्रो. यूसी चौधरी और केएलडीएव पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. डीएल अग्रवाल ने आकर धरने को समर्थन दिया। जेपी बडोनी ने कहा कि जब तक मातृ सदन का आंदोलन जारी रहेगा पर्यावरण और गंगा बचाने की मुहिम के लिए तब तक स्थानीय लोग भी धरने पर डटे रहेंगे। इस मौके पर राकेश, अजय, सुरेन्द्र सिंह, ठाकुर सिंह, आशीष गौड़, अखलेश, श्रवण कुमार, नत्थुराम आदि मौजूद रहे।

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