प्राइवेट के भरोसे अल्ट्रासाउंड सेवा!

Haridwar Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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हरिद्वार। भ्रूण हत्या रोकने के लिए भले ही तमाम सरकारी प्रयास किए जा रहे हों। लेकिन, सिस्टम की लापरवाही भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं है। अल्ट्रासाउंड तकनीक का हाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग जहां जनपद में सात अल्ट्रासाउंड मशीनों का संचालन ठीक से नहीं करवा पा रहा है। वहीं प्राइवेट में 70 अल्ट्रासाउंड मशीनें संचालित हो रही है।
पीसी पीएनडीटी एक्ट यानी गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन का प्रतिषेध) अधिनियम के भ्रूण हत्या रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड के जरिए लिंग परीक्षण को भ्रूण हत्या के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना गया है। इसलिए अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी रखी जा रही है। लेकिन, स्थिति यह है कि सरकारी अस्पतालों में जहां कायदे कानूनों के तहत गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड टेस्ट होता है वहां सेवाएं ठप है। जिले में जिला अस्पताल, रुड़की सिविल अस्पताल, लक्सर सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। जबकि भगवानपुर, नारसन सीएचसी, ज्वालापुर सीएचसी और मेला अस्पताल में डाक्टर के अभाव में मशीनें जंक खा रही हैं। जिला अस्पताल में डाक्टर के अवकाश के चलते पिछले तीन दिन से अल्ट्रासाउंड ठप है। जन स्वास्थ्य अभियान के जिला समन्वयक दिनेश धीमान का कहना है सरकारी अस्पतालाें में अल्ट्रासाउंड सेवा का ठीक संचालन नहीं होने से लोग प्राइवेट सेंटरों का रुख कर रहे हैं। जिसका फायदा तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वाले लोग उठा ले रहे हैं। घटते लिंगानुपात की यह भी एक वजह हो सकती है।
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सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ का रोना
सरकारी अस्पताल, अल्ट्रासाउंड मशीनों के संचालन न हो पाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट के अभाव का रोना रोता है। वहीं प्राइवेट में प्लेन एमबीबीएस डाक्टर छह-छह माह का प्रशिक्षण लेकर अल्ट्रासाउंड मशीनों को ऑपरेट कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी अपने प्लेन एमबीबीएस डाक्टर को प्रशिक्षण देेकर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन जिम्मेदार लोग इस पर सोचने को तैयार ही नहीं है।
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प्रशासनिक सेवाएं दे रहे विशेषज्ञ डाक्टर
ऐसा नहीं है कि जिले में रेडियोलॉजी सेवाओं के संचालन के विशेषज्ञ डाक्टर का अभाव है। बल्कि जनपद में दो रेडियोलॉजिस्ट ऐसे भी हैं जिन्हें अस्पतालों के बजाय प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी गई हैं। डा. मनीष दत्त जहां पहले मेला अस्पताल और ज्वालापुर सीएचसी में सप्ताह में तीन-तीन दिन समय देकर अल्ट्रासाउंड व्यवस्था संभाल रहे थे। उन्हें यहां से हटाकर सीएमओ कार्यालय में टीकाकरण और पोलियो जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दे दी गई है। वहीं रुड़की में डिप्टी सीएमओ डा. आरके आनंद को पीसीपीएनडीटी एक्ट का नोडल अधिकारी बना दिया गया है।
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जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटर
सरकारी - 07
अर्द्धसरकारी - 02
गैर सरकारी - 70
कुल - 79
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सरकारी अस्पतालाें में अल्ट्रासाउंड सेवा बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों विशेषज्ञ डाक्टर प्रशासनिक कार्यों में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अगर उन्हें वहां से हटा दें तो यह काम प्रभावित होंगे। शासन से मांग की जा रही है कि वह जनपद में रेडियोलॉजिस्ट एवं अन्य विशेषज्ञों की तैनाती करें।
-डा. दीपा शर्मा, सीएमओ हरिद्वार

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