समय से चूके तो टैक्स के बराबर जुर्माना

Haridwar Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
हरिद्वार। नए वाहन का पंजीकरण कराना हो या परिवहन का टैक्स जमा कराना हो तो इसके लिए अब समय का खास ख्याल रखना होगा। निश्चित अवधि में टैक्स जमा न कराने वालों को अब जुर्माने के तौर पर पहले से कहीं ज्यादा रकम चुकानी होगी। व्यवसायिक वाहनों के स्वामियों पर तो टैक्स के बराबर जुर्माने का चाबुक चलेगा। निजी वाहनों को कुल टैक्स की पांच फीसदी राशि बतौर जुर्माने के तौर पर ही देनी होगी।
पहले की व्यवस्था में जुर्माने की राशि नाममात्र होने के कारण वाहन स्वामी समय से पंजीकरण और टैक्स जमा नहीं कराते थे। कई वाहन तो महीनों-सालों तक बिना पंजीकरण के सड़कों पर दौड़ते रहते थे। पहले समय पर परिवहन कर अदा न करने पर स्कूटर एवं बाइक पर मात्र आठ रुपये और कार पर 20 रुपया प्रतिमाह के हिसाब से जुर्माना वसूला जाता था। लेकिन, एक दिसंबर से वाहनों के लिए नए टैक्स नियम लागू कर दिए गए हैं। अगर निजी वाहन का स्वामी वाहन खरीदने के सात दिन के अंदर परिवहन कर जमा नहीं करता तो उससे लगने वाले टैक्स की पांच प्रतिशत राशि अतिरिक्त जुर्माने के तौर पर वसूली जाएगी। व्यवसायिक वाहनों के मामले में तो नियम और भी कड़े हो गए हैं। यदि व्यवसायिक वाहन स्वामी समय से टैक्स अदा नहीं करते तो उन्हें वाहन पर लगने वाले परिवहन कर के बराबर का जुर्माना भरना होगा। व्यवसायिक वाहनों को टैक्स जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
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कीमत के आधार पर तय होगा टैक्स
हरिद्वार। नए नियम के तहत निजी वाहनों की कीमत के अनुसार अब स्वामियों को परिवहन कर जमा करना होगा। एक दिसंबर से लागू नियम के तहत वाहनस्वामियाें को दस लाख रुपये तक की कीमत के वाहनों पर चार प्रतिशत और दस लाख रुपये से ज्यादा की कीमत के वाहनों पर पांच प्रतिशत कर अदा करना होगा।
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व्यवसायिक वाहनों के लिए अलग दर
हरिद्वार। व्यवसायिक वाहनों से परिवहन कर वसूलने का तरीका अलग होगा। उदाहरण के तौर पर ऑटो रिक्शा से प्रति सीट एक हजार रुपये वार्षिक परिवहन कर वसूला जाएगा। व्यवसायिक वाहन स्वामी अगर समय पर टैक्स अदा नहीं करते तो उन्हें टैक्स के बराबर ही जुर्माना भरना होगा। यानी आटो स्वामी को समय के बाद प्रति सीट दो हजार रुपये देने होंगे।
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कब-कब जमा होता है परिवहन कर
हरिद्वार। निजी वाहन, बाइक और कार आदि से वनटाइम टैक्स लिया जाता है। यानी जब आप अपने वाहन का पंजीकरण कराने जाते हैं तो आपसे पूरा परिवहन कर एक बार ही ले लिया जाता है। वहीं व्यवसायिक वाहनों से एक निश्चित अवधि का टैक्स वसूला जाता है और निश्चित अवधि के बाद वाहन स्वामियों को फिर से टैक्स जमा कराना होता है। बस स्वामी को हर माह, आटो रिक्शा प्रति वर्ष और टैक्सी एवं मैक्स आदि के स्वामियों को हर तीन माह मेें टैक्स जमा करना होता है।
कोट
- परिवहन कर की नई दरें एक दिसंबर से लागू हो गई हैं। पहले कम जुर्माने के चलते समय पर टैक्स जमा कराने में कई लोग दिलचस्पी नहीं लेते थे। लेकिन अब नई नीति से समय पर कर जमा होने की उम्मीद है।
सुधाकर चंदोला, एआरटीओ (प्रशासन) हरिद्वार।
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नए टैक्स को लेकर खोला मोर्चा
हरिद्वार। आटो रिक्शा-विक्रम टैपों महासंघ और टैक्सी चालक/मालिक समिति ने नई टैक्स दरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आटो रिक्शा-विक्रम टैपों महासंघ अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि बढ़े टैक्स को लेकर एक ज्ञापन परिवहन मंत्री और कमिश्नर को दिया गया। लेकिन, कोई हल नहीं निकला। उन्होंने कहा कि डीजल के दाम और पार्टस पहले से महंगे हो चुके हैं। ऐसे में आटो रिक्शा और विक्रम पर बढ़े टैक्स लगाना ठीक नहीं हैं। दूसरी ओर टैक्सी चालक/मालिक समिति के अध्यक्ष नाथीराम सैनी एवं संचालन महामंत्री सुभाष गोस्वामी ने कहा कि सरकार गाड़ियों में बढ़ाए टैक्स को तत्काल वापस लें। उन्होंने कहा कि बढ़े टैक्स के विरोध में 11 दिसंबर को प्रदेश में टैक्सियों का चक्का जाम किया जाएगा।

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