रजिस्ट्रार दफ्तर से जुटाए विक्रय सम्बंधी दस्तावेज

Haridwar Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
हरिद्वार। मध्य प्रदेश इंदौर के जिलाधिकारी आकाश त्रिपाठी शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने हरिद्वार के जिलाधिकारी सचिन कुर्वे सहित अनेक अधिकारियों से वार्ता कर कुशावर्त के प्रकरण पर चर्चा की। त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि कुशावर्त को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। ट्रस्ट को सम्पत्ति बेचने का कोई अधिकार नहीं है।
उधर, नगर निगम ने इंदौर से आई अधिकारियों की पांच सदस्यीय टीम को कुशावर्त से सम्बंधित एसेसमेंट की प्रति सौंप दी है। मालिकान के खाते में देवी खासगी अहिल्याबाई होल्कर का नाम दर्ज है। होल्करवाड़े की सम्पत्ति में भी किस अन्य का नाम दर्ज नहीं किया गया है। इंदौर से आई अधिकारियों की टीम ने आज पुन: रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर कागजात खंगाले और कईं दस्तावेज हासिल किये। इसी भांति एक टीम ने पुन: सचिवालय जाकर कुछ रिपोर्ट प्राप्त की।
इंदौर के डीएम आकाश त्रिपाठी ने हरिद्वार के जिलाधिकारी सचिन कुर्वे के साथ लम्बी वार्ता की। दोनों अधिकारी इस बात पर सहमत थे कि हरिद्वार के प्राचीन पौराणिक तीर्थ स्थल कुशावर्त और होल्करवाड़े पर किसी का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। आकाश त्रिपाठी ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि अवैध रूप से की गई रजिस्ट्रियों को निरस्त कर दिया जाए। सचिन कुर्वे ने आश्वासन दिया है कि कोई भी गैरकानूनी काम हरिद्वार में नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले में इंदौर प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग हरिद्वार प्रशासन करेगा। इंदौर के जिलाधिकारी ने अलकनंदा अतिथि गृह में अन्य कईं अधिकारियों को भी बुलाया और उनसे दस्तावेज हासिल किए। मध्य प्रदेश से आई टीम में एडीएम इंदौर आलोक सिंह, तहसीलदार इंदौर बिहारी सिंह, नजूल अफसर शरद शोहत्री आदि शामिल थे।
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कई जगहों पर बेची गई जमीन
इंदौर में प्लाट काटकर कालोनी बसाने का मामला
हरिद्वार।
इंदौर के जिलाधिकारी आकाश त्रिपाठी ने अलकनंदा अतिथि गृह में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि हरिद्वार के अलावा रामेश्वरम, अयोध्या, वाराणसी सहित कुछ देश के कई जगहों पर अहिल्याबाई से जुड़ी संपत्तियों को बेचने का मामला सामने आया है। संपत्तियों पर मध्य प्रदेश शासन का कब्जा लेने की कार्रवाई सबसे पहले धर्मनगरी से शुरु की गई है।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार में कुशावर्त घाट का विक्रय सम्बंधी एक पत्र मुख्य सचिव उत्तराखंड की ओर से मुख्य सचिव मध्यप्रदेश को भेजा गया। जिसमें कमिश्नर पौड़ी की रिपोर्ट लगी थी। यह संपत्ति मध्य प्रदेश शासन की थी, इसलिए इसकी देखरेख कर रहे खासगी ट्रस्ट को बिना सरकार की अनमुति के इसे बेचने का अधिकार नहीं था। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम, वाराणसी, अयोध्या आदि तीर्थ स्थलों पर भी अहिल्याबाई से जुड़ी संपत्ति बेचने की सूचना मिली है। खुद इंदौर में ही जमीन पर प्लाट काटकर कालोनी बसाने का मामला सामने आया है। इस सम्बंध में इंदौर प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार ने कार्रवाई शुरु कर दी है। वहीं ऐसे 18 जिलों के कलेक्ट्रेट को पत्र लिखा गया है, जहां अहिल्याबाई से जुड़ी संपत्तियां है। उन्हें लिखा गया है कि वे इस पर मध्य प्रदेश की संपत्ति होना अंकित करें और अगर इनका विक्रय विलय हुआ है तो उसे निरस्त करें। उन्होंने बताया कि इस गड़बड़ी में शामिल लोगों को कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है। क्योंकि बगैर पॉवर ऑफ एटोनी हुए बगैर सरकारी संपत्ति को बेचना अपराध बोध कराता है। इस सम्बंध में मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ने भी अपनी जांच में कानूनी कार्रवाई की संस्तुति कर चुके हैं।

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