पनवाड़ की फली खाने से एक और बच्चे की मौत

Haridwar Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
रुड़की। पनवाड़ की फली खाने से मंगलवार को एक और बच्चे की मौत हो गई है। तीन सप्ताह के भीतर पनवाड़ की फली खाने से मरने वाले बच्चों की संख्या सात पहुंच चुकी है। कई बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है। विभाग की ओर से अब लोगों को जागरूक किया जाएगा।
पीरपुरा गांव निवासी दो वर्षीय आयान ने खेलते समय पनवाड़ की फली खा ली थी। इसके कुछ घंटों बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उसे सोमवार को चंद्रपुरी स्थित नर्सिंग होम में भर्ती कराया। लेकिन मंगलवार सुबह उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। बता दें कि तीन सप्ताह के भीतर पनवाड़ की फली खाने से सात बच्चों की मौत हो चुकी है। एक के बाद एक बच्चों की मौत से स्वास्थ्य महकमा भी हरकत में आ गया है। विभाग की ओर से देहात में पनवाड़ की फली के प्रति लोगों को जागरूक करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम देहात क्षेत्रों में जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक करेगी। साथ ही उन्हें इसके जागरूक करेगी।

दो फली से ज्यादा खाने वालों का बचाना मुश्किल
चिकित्सकों के मुताबिक, अगर बच्चा दो से अधिक पनवाड़ की फली खा ले तो उसे बचा पाना मुश्किल हो जाता है। प्राइवेट अस्पताल के डा. संजय गर्ग ने बताया कि उनके नर्सिंग में पनवाड़ की फली खाने से बीमार हुए पांच बच्चों को लाया जा चुका है। बच्चों ने अधिक मात्रा में पनवाड़ की फली खाई थी। इसी वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका। वहीं एक अन्य निजी अस्पताल के चिकित्सक डा. अरुण कुमार ने बताया कि पनवाड़ की फली खाने से बीमार हुए पांच बच्चों को उनके नर्सिंग होम में पिछले तीन सप्ताह के भीतर भर्ती कराया जा चुका है। जिनमें से दो बच्चों की मौत हो गई थी। एक बच्चे को रेफर कर दिया गया था। दो बच्चों ने कम मात्रा मेें फली खाई थी। इसलिए वह ठीक होकर जा चुके हैं। डा. सुधीर चौधरी ने बताया कि उनके नर्सिंग में भी दो बच्चों को लाया गया था। जिनमें पनवाड़ की फली खाये जाने संबंधी कुछ लक्षण दिखाई दे रहे थे। इन दोनों बच्चों ने फली के कुछ ही दाने खाए थे। जिसकी वजह से उनकी जान बच गई।

क्या है पनवाड़
पनवाड़ का पौधा नालियों और झाड़ियों आदि में सामान्य तौर पर दिखाई दे जाता है। देहात क्षेत्र में यह पौधा ज्यादा दिखाई देता है। इस पौधे पर पीले फूल आते हैं। लोबिया जैसी पतली और लंबी फली लगती है। जिसमें दाने होते हैं। दानों का स्वाद कुछ-कुछ मटर के दाने जैसा होता है।

क्या होता है इसे खाने से
- पनवाड़ की फली यदि बच्चा खा ले तो उसे उल्टी आती
- कुछ देर बाद ही बेहोशी छाने लगती है
- शरीर बुखार की तरह तपने लगता है
- फली के बीज में एल्केलोयडस होता है, जो शरीर जाते ही प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है
- इसका सीधा असर जिगर, मांसपेशी और मस्तिष्क पर पड़ता है।

ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एक टीम बनाई गई है। जो गांवों में जाकर लोगों को पनवाड़ की फली के प्रति जागरूक करेगी। लोगों को चाहिए कि वे बच्चों को पनवाड़ आदि की फली न खाने दें। साथ ही आसपास पनवाड़ का पौधा दिखाई दे तो उसे उखाड़ कर जला दें।
- डा. दीपा शर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी, हरिद्वार

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