580 करोड़ से संवरेगी धर्मनगरी

Haridwar Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। विश्व बैंक की सहायता से उत्तराखंड में शुरू किए गए मिशन क्लीन गंगा प्रोजेक्ट से हरिद्वार के कई इलाकों की सूरत संवरने वाली है। अभी तक सीवरेज की कमी और गंदगी से जूझ रही नवविकसित कालोनियों में अब पॉश कालोनियों की तरह सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गंगा में सीवरेज और नालों की गंदगी रोकने के लिए बनाए गए इस प्रोेजेक्ट का फायदा धर्मनगरी की लाखों की आबादी को भी मिलेगा। हरिद्वार में ही 580 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मिशन क्लीन गंगा 2020 के नाम से यह प्रोजेक्ट नेशनल गंगा रिवर बेसिन अॅथारिटी की ओर से तैयार किया गया है। इसमें देश के पांच राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल) को शामिल किया गया है। उत्तराखंड में प्रोजेक्ट का काम वर्ष 2016 तक पूरा किया जाना है। इसके तहत 1548 करोड़ रुपये खर्च कर प्रदेश में गंगा में गिर रही गंदगी पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। गंगा, भागीरथी एवं अलकनंदा नदी के तटों पर बसे नगरों एवं गांवों को प्र्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मलजल शोधन संयंत्र लगेेंगे। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम और अंतिम रूप से उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा।
इनसेट
कहां कितनी राशि होगी खर्च
>> हरिद्वार में 580 करोड़ रुपये
>> ऋषिकेश में 400 करोड़ रुपये
>> मुनिकीरेती में 110 करोड़ रुपये
>> प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में 458 करोड़
इनसेट
यह होंगे प्रमुख काम
>> गंगा के किनारे बसी बस्ती में डाले जाएंगे सीवर
>> सॉलिड वेस्ट का अंतिम रूप से ट्रीटमेंट
>> गंगा के तटीय घाटों का किया जाएगा सुंदरीकरण
>> ग्रीन इको शवदाह गृह भी बनाए जाएंगे
>> गंगा किनारे गांवों में धोबीघाट बनाए जाएंगे
>> सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा

हरिद्वार के इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
मोतीचूर से दूधाधारी चौक तक दोनों तरफ, कनखल से जगजीतपुर तक सीवरेज से छूटे शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र, सीतापुर, सराय और शिवालिक नगर, रावली महदूद तक शहरीकरण की ओर बढ़ रहा ग्रामीण क्षेत्र।

प्रदेश के अन्य इन इलाकों को होगा फायदा
बदरीनाथ, केदारनाथ, पांडुकेश्वर, गोविंद घाट, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, श्रीकोट गंगनाली व देवप्रयाग, गंगोत्री, उत्तरकाशी, डूंडा, तपोवन, मुनिकी रेती, ढालवाला, ऋषिकेश, स्वर्गश्राम, लक्ष्मण झूला, ऋषिकेश ग्रामीण से रायवाला ग्रामीण क्षेत्र तक।

मिशन क्लीन गंगा के तहत मुनिकीरेती एवं तपोवन में काम शुरू किया गया है। हरिद्वार एवं ऋषिकेश में वर्ष 2013-14 में काम शुरू होगा। वर्ष 2016 तक सभी योजनाओं को अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। योजना का पांच साल तक रख रखाव, निर्माण और डिजायन करने वाली कार्यदायी संस्था करेगी।
-वाईके मिश्रा, परियोजना प्रबंधक, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा)।

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