मानकों की अनदेखी कहीं पड़े न भारी

Haridwar Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
रुड़की। पटाखों की दुकानेें लगाने में कहीं मानकों की अनदेखी भारी न पड़ जाए। नियमों की अवहेलना से कभी भी अनहोनी हो सकती है। इस बार भी पटाखे की दुकानें नेहरू स्टेडियम में लगाई जाएंगी। प्रशासन की ओर से हर बार की तरह इस बार भी पटाखे की दुकानों के लिए मानक तय हैं लेकिन पुलिस प्रशासन इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं देता। नतीजतन मानकों की अक्सर अनदेखी की जाती रही है जिससे पटाखा बाजार में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
दीपावली पर्व को लेकर गोदामों में पटाखे जमा हो चुके हैं। दीपावली के दो-तीन दिन पहले नेहरू स्टेडियम में पटाखों की दुकानें सज जाएंगी। भारत सरकार की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार पटाखा विक्रेता केवल 80 डेसीबल वाले पटाखों की ही बिक्री कर सकते हैं लेकिन दीपावली पर लगने वाली पटाखों की दुकानों पर 100 डेसीबल से भी अधिक आवाज वाले पटाखे धड़ल्ले से बिकते हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस एवं फायर ब्रिगेड के अधिकारी यह कहकर अपना बचाव कर लेते हैं कि पटाखे को देखकर पता नहीं चल पाता है कि एक पटाखा कितनी आवाज करेगा। इसी तरह से ज्यादा धुआं अथवा प्रदूषण करने वाले पटाखों पर भी रोक है लेकिन ऐेसे पटाखे भी दुकानों पर खूब बिकते हैं। इनमें अनार आदि शामिल हैं जिनसे तेज रोशनी के साथ ही भारी धुआं भी निकलता है।

..तो चार गोदामों में हैं तीन करोड़ से अधिक के पटाखेे
दीपावली पर हर साल करोड़ों रुपये के पटाखे बिकते हैं। इस बार भी दीपावली पर तीन करोड़ रुपये मूल्य के पटाखे बिकने का अनुमान है। फायर ब्रिगेड के एफएसओ बीएल डबराल का कहना है कि लिखापढ़ी में क्षेत्र में पटाखों के चार गोदाम हैं जिसमें से तीन गोदाम तो ब्रहमपुरी में हैं जबकि एक गोदाम मंगलौर क्षेत्र मेें है। सूत्रों का कहना है कि इन चार गोदामों के आलावा शहर के भीतर आबादी क्षेत्र में पटाखों के कई अवैध गोदाम हैं।

पूर्व में गोदाम से माल ले जाते हो चुका हादसा
सिविल लाइंस क्षेत्र में रुड़की तिराहे के समीप बने एक पटाखा गोदाम से पिछली दीपावली को पटाखों की पेटी ले जाते समय एक बड़ा हादसा हो गया था। इस दौरान एक रिक्शे वाला मौत की आगोश में समा गया था जबकि कई लोग घायल हो गए थे। धमाके से आसपास के घर दहल गए थे। घरों में दरार आ गई थी और खिड़कियों के शीशे टूट गए थे।
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पटाखों की दुकानों के लिए मानक
-80 डेसीबल से अधिक आवाज वाले पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित
-ज्यादा धुआं देने वाले पटाखों की नहीं हो सकती बिक्री
-पटाखों की दो दुकानों के बीच तीन मीटर की दूरी जरूरी
-सुरक्षित स्थान से 50 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए पटाखों की दुकान
-सभी दुकानों का होना चाहिए बिजली का एक मास्टर स्विच
-दुकान के पास पानी से भरे ड्रम की हो हरदम व्यवस्था
-ड्रम में टाट या खाली बोरा रहना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे आग के ऊपर डाला जा सके
-दुकान के पास रेत से भरी बाल्टियां आदि होनी चाहिए
-दुकानें आमने सामने नहीं होनी चाहिएं
-आग बुझाने वाला यंत्र की व्यवस्था होनी चाहिए
-दुकान पर मोमबत्ती आदि से रोशनी नहीं होनी चाहिए
-एक लाइन में 50 से अधिक दुकानें न हों

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