कूड़ा नहीं उठा पा रहा निगम

Haridwar Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। नगर निगम पहले तो शहर की सफाई करने में नाकाम रहा। जब बाहर के लाखों लोग शहर और गंगा की सफाई करके कूड़ा एकत्रित कर गए तो अब निगम उसे डंपिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंचा पा रहा है। नगर निगम की इस काहिली से डेरा सच्चा सौदा का सफाई अभियान अकारथ जा रहा है। लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि नगर निगम और सफाई के नाम पर रुपये डकारने वाली संस्थाएं एकत्रित कूडे़ को भी नहीं उठा पा रही हैं। तीन दिन बीतने के बाद भी शहर की प्रमुख सड़कों और गंगा घाटों पर कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं।
एक नवंबर को डेरा सच्चा सौदा के लाखों सेवादारों ने शहर और गंगा की सफाई का अभियान चलाया था। सेवादारों ने शिद्दत के साथ सफाई की, जिसकी छोटे से लेकर बड़ों तक ने सराहना की। लेकिन जिस नगर निगम के पास शहर की साफ सफाई का जिम्मा है, वह सेवादारों द्वारा एकत्रित कूड़े को आज तीन दिन भी नहीं उठा पाया। हालांकि निगम के अधिकारी हर रोज दावा करते रहे कि एकत्रित कूड़ा कल तक उठा लिया जाएगा। लेकिन उस पर अमल नहीं कर पाए। हालत यह है कि शहर के प्रमुख इलाकों से भी कूड़ा नहीं उठ पाया है। गंगा घाटों पर कूड़े के ढेर परेशानी का सबब बने हुए हैं।
वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश जोशी ने बताया कि रविवार को 12 डंपर, तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली और तीन जेसीबी अतिरिक्त उपलब्ध कराई गई। कुल मिलाकर 27 गाड़ी और छह जेसीबी कूड़ा उठाने में लगी हैं। दावा किया कि शहर के प्रमुख स्थानों को क्लीन कर दिया गया है। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर स्वामी विवेकानंद पार्क के अंदर, नीचे गंगा तट पर कूड़े के ढेर बिखरे पड़े हैं। पॉलीथिन और कचरा उड़-उड़कर फैलने लगा है। नहर पटरी के किनारे कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। गऊघाट पुल की सीढ़ियों पर दो बड़े ढेरों को निगम ने छुआ तक नहीं है।

इनसेट...
एकत्रित कूड़े को दबा रहा सिंचाई विभाग
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने गंगनहर के अंदर लगे कूड़े-कचरे के ढेराें को बाहर निकलवाने के बजाए, जेसीबी से समतलीकरण करने में लगा है। बिरलाघाट के ऊपर से कूड़े के कई ढेर गंगनहर से नहीं उठे हैं। जबकि नीचे के ढेर जेसीबी से नहर में ही दफन कर दिए गए हैं।


संसाधनों के अभाव में हांफ रहा निगम

शहर में प्रतिदिन 150 मीट्रिक टन कूड़ा जनरेट
नगर निगम के पास करीब 650 सफाई कर्मचारी

हरिद्वार। संसाधनों के अभाव में नगर निगम ‘हांफ’ रहा है। सरकार ने नगरपालिका परिषद को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा तो दिया लेकिन संसाधन नगर पंचायत के बराबर भी नहीं हैं। यही वजह है कि डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों द्वारा शहर में एकत्रित और गंगा से निकाला कूड़ा उठाने में निगम का दम फूल रहा है।
नगरपालिका के समय जहां कूड़ा उठाने में 30 से 34 वाहनों का प्रयोग दिखाया जाता था, वहीं अब कुल 12 गाड़ियां ही कूड़ा निस्तारण में लगी हैं। शहर में प्रतिदिन 100 से 150 मीट्रिक टन कूड़ा जनरेट होने का अनुमान है। जिसके निस्तारण की साइंटिफिक ढंग से लैंड फिलिंग की व्यवस्था तक नहीं है। शहर से उठाकर हाईवे, गंग नहर के बीच की सिंचाई विभाग की खाली जगह पर कूड़ा डाला जाता है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

इनसेट...
40 नई कालोनियों में सफाई की व्यवस्था ही नहीं
नगर निगम की 40 से अधिक नई आवासीय कालोनियों में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। सिडकुल से शहर पर आबादी का दबाव कई गुना बढ़ गया है। गांवों से रोजगार की तलाश में आ रहे लोग सस्ते सुलभ आवास न होने से स्लम एरिया में रह रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में ही लगभग 50 हजार की आबादी झोपड़ पट्टी में रहती है। धर्मनगरी में आफ सीजन में भी शनिवार और रविवार को हजारों लोग आते हैं, जो गंदगी छोड़कर चले जाते हैं।

कोट
हरिद्वार के महत्व और आवश्यकता के हिसाब से संसाधनों की भारी कमी है। हम बीते जमाने के ढंग से सफाई का काम कर रहे हैं। आधुनिक उपकरणाें और तकनीक की सख्त जरूरत है। संसाधन जुटाने के लिए धन होना चाहिए जो निगम के पास नहीं है। हालात ऐसे हैं कि संविदा सफाई कर्मियोें के मानदेय का भुगतान करने तक के लिए पैसे नहीं हैं। इसके बावजूद हम स्थिति को सुधारने में लगे हैं।
- डा. कैलाश जोशी, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी।

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