झील को पाटकर बन रहे घर, प्रशासन बेखबर

Haridwar Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
रुड़की। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से करीब 16 लाख रुपये ठिकाने लगाने के बाद भी पाड़ली गुज्जर झील की तस्वीर नहीं बदल सकी। लेकिन, प्रशासन की लापरवाही के चलते झील अब अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुकी है। आसपास के लोग झील को पाटकर घर खड़े कर रहे हैं और तहसील प्रशासन चुप्पी साधे है।
रुड़की रेलवे स्टेशन से सटे गांव पाड़ली गुज्जर और गंगनहर से सटी पाड़ली गुज्जर झील का मनरेगा के तहत सुंदरीकरण करने के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 मेें 24 लाख रुपये का बजट सीधे जिला प्रशासन की ओर से भेजा गया था। पहली किस्त के तहत मई 2011 में झील का सुंदरीकरण करने के लिए 15 लाख 96 हजार रुपये का बजट विकास विभाग को दिया था। लेकिन, इस धन की ऐसी बंदरबांट हुई कि दूसरी किस्त का पैसा ही आवंटित नहीं हो सका। पहली किस्त की धनराशि में भारी घोटाला होने से करीब 110 बीघा क्षेत्र में फैली झील के सुंदरीकरण की योजना खटाई में पड़ गई। इस कारण जिला प्रशासन ने दूसरी किस्त पर रोक लगा दी। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते अब भू-माफिया झील को पाटकर उस पर प्लाटिंग कर कालोनियां बसा रहे हैं। लेकिन, कोई देखने वाला नहीं है।

आज तक नहीं हो सका घोटाले का खुलासा
पाड़ली गुज्जर झील में मनरेगा के तहत मिले सुंदरीकरण बजट के घोटाले में ग्रामीण दो बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन दोनों शिकायतों की जांच सरकारी कार्यालयों में ही दबकर रह गई है। जांच के नाम पर अधिकारियों को बचाने के लिए उच्चाधिकारियों की ओर से मात्र खानापूर्ति की जा रही है। जिससे करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी आज तक इस घोटाले का खुलासा नहीं हो पाया है।

फर्जी मजदूरों के नाम निकाला पैसा
मनरेगा से झील का सुंदरीकरण करने के लिए मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से कुछ काम कराया गया और योजना के तहत मिले बजट को फर्जी मजदूरों के नाम निकाल लिया गया। जब ग्रामीणों को इसका पता लगा तो कुछ जागरूक लोगों ने मामले की शिकायत अधिकारियों से की। शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचने से पहले ही अधिकारियों की मिलीभगत के चलते बजट को ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन प्राथमिक जांच में ही भारी अनियमितताएं पाए जाने पर उच्चाधिकारियों ने दूसरी किस्त पर रोक लगा दी। जिससे मनरेगा के तहत झील का सुंदरीकरण होना अटक गया।
पाड़ली गुज्जर झील पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। अगर किसी ने अतिक्रमण किया होगा, तो उसे हटाया जाएगा। अधिकारियों को इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
- सोनिका, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की।

मामला संज्ञान में नहीं है। अधिकारियों से मामले की जानकारी लेकर जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। झील का निरीक्षण करने के बाद उसका सुंदरीकरण के लिए भी प्रयास किया जाएगा। - बीएस धनिक, मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार।

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