पानी सिर से गुजरा तो टूटी प्रशासन की नींद

Haridwar Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
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रुड़की। जल निकासी के विवाद को लेकर पहले मोहनपुरा के ग्रामीणों ने जाम लगाकर मार्ग अवरुद्ध किया, इसके चार महीने बाद तहसील परिसर में एक सप्ताह तक आमरण अनशन का दौर चला। ग्रामीणों ने फिर आमरण अनशन की चेतावनी दी तो आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी। शनिवार को प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षाें के बीच 15 दिसंबर तक मनरेगा से तालाब खुदवाने और नाली बनवाने पर समझौता कराया।
मोहनपुरा गांव में वर्तमान और पूर्व प्रधान पक्ष रास्ते में मिट्टी डाले जाने और पानी की निकासी न होने को लेकर कई महीनों से आमने सामने हैं। बरसात के दिनाें में दोनों पक्षाें की ओर से सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया गया था। लेकिन प्रशासन ने कुछ नहीं किया। इसके बाद ढेरों शिकायताें पर भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं प्रधान पक्ष की ओर से तहसील परिसर में निकासी के मुद्दे को लेकर किया गया एक सप्ताह का आमरण अनशन 25 अक्तूबर को समाप्त किया गया। रविवार को एएसडीएम कृष्ण कुमार मिश्रा एवं सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी कुलदीप असवाल पुलिस फोर्स के साथ मोहनपुरा गांव पहुंचे। इस दौरान प्रशासन को दोनों पक्षों के गतिरोध का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने दोनाें पक्षाें के मुअज्ज्जि लोगों से वार्ता कर इस बात पर समझौता कराया कि फिलहाल मोहनपुरा गांव का पानी यहीं के तालाब में छोड़ा जाएगा। इसके बाद ग्राम प्रधान की ओर से 15 दिसंबर तक मनरेगा के तहत वाल्मीकि बस्ती के तालाब की खुदाई और नाली का निर्माण कराया जाएगा।


फैसला हुआ पर दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं
प्रशासन के फैसले पर पूर्व प्रधान और वर्तमान प्रधान पक्ष की ओर से हस्ताक्षर तो कर दिए गए हैं। लेकिन दोनों ही पक्ष फैसले से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। वर्तमान प्रधान प्रमोद कुमार का कहना है कि जो फैसला हुआ है वह नाकाफी है। जो पानी जमा था वह भी हमने खुद पाइपों के जरिए निस्तारित कराया। साथ ही रास्ते पर डाली गई मिट्टी उठाए जाने के बारे में भी कोई फैसला नहीं लिया गया। वहीं, पूर्व प्रधान दारा सिंह का कहना है कि फैसला तो हो गया। लेकिन जल भराव की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। पानी अब भी पहले की ही तरह सड़कों पर जमा है।

तय तिथि तक समस्या निपटेगी या नहीं, गारंटी नहीं
प्रशासन ने फैसला तो करा दिया। लेकिन मोहनपुरा और ढंढेरा बस्ती के लोगों की बदबूदार पानी के भराव की समस्या ज्यों की त्यों है। तालाब का पानी ओवरफ्लो होकर बस्ती की गलियों में जमा हो रहा है। प्रशासन ने 15 दिसंबर तक हालात सही कराने का फैसला कराया है। लेकिन तब तक ग्रामीणों को इसी हालत में जीना पड़ेगा। हालांकि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि तय तिथि तक नाली आदि का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

तालाब का पानी खाली हो तो बन सकती है बात
गांव के तालाब में पानी ऊपर तक भर चुका है। अब इसमें और पानी की गुंजाइश नहीं है। ऐसे में तालाब का पानी खाली कराया जाए तो ही समस्या का समाधान हो सकता है। ग्रामीणों के अनुसार पानी निकासी को लेकर तहसीलदार ने पूर्व में निरीक्षण किया था। ग्रामीणों द्वारा इसकी बार-बार मांग उठाई गई थी कि तालाब का पानी खाली कराने की व्यवस्था की जाए। लेकि न इसके कोई प्रयास नहीं किए गए।

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