ठेके पर चल रही ऊर्जा निगम की ‘पावर’

Haridwar Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। ऊर्जा निगम में ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह से हावी हो चुकी है। हालत यह है कि मीटर लगाने, रीडिंग लेने से लेकर लाइनें ठीक कराने जैसा जिम्मा भी ठेकेदारों और एजेंसी के कर्मचारियाें के हाथों में ही है। शहर और देहात क्षेत्र को रोशन करने के लिए निगम के पास कर्मियों का भारी टोटा है, जिससे अधिकांश कार्य एजेंसियों से करवाना मजबूरी बन गया है। घरों और दुकानों में विद्युत मीटर लगाने में गड़बड़ी की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। बावजूद इसके, यह कार्य भी स्थाई कर्मचारियों की बजाय एजेंसी से जुड़े लोग ही कर रहे हैं। अनुभव की कमी के चलते ये कर्मी कई बार छोटे-छोटे फाल्ट ठीक करने में भी काफी समय लगा देते हैं। जिसका खामियाजा उपभोक्ता झेलते हैं। बिजलीघरों की हालत भी ठीक नहीं हैं। ज्यादातर बिजलीघरों में संविदा कर्मी तैनात हैं। कई बिजलीघर तो पूरी तरह संविदा कर्मियों के भरोसे ही चल रहे हैं। आपूर्ति बंद और चालू करने का काम भी इन्हीं के भरोसे है। जिम्मेदारी वले कार्यों को संविदा और एजेंसी कर्मियों के भरोसे छोड़ना घोर लापरवाही का ही नतीजा है, जिसकी कीमत ऊर्जा निगम के साथ ही उपभोक्ता भी चुका रहे हैं।

बढ़ रहे मीटरों में शंट के मामले
ऊर्जा निगम और विजीलेंस टीम के छापों के दौरान घरों और दुकानों से तमाम ऐसे मीटर पकड़े जा चुके हैं, जिनमें शंट या फिर रिमोट सिस्टम फीट किया गया था। इन मीटरों में सील ऊर्जा निगम की ही लगी होती है। बिना सील तोड़े मीटर में अंदर गड़बड़ी करना संभव नहीं है। न ही मीटर में लगी सील को दोबारा हासिल किया जा सकता है। जाहिर है, मीटर लगाने वाले ही इन गड़बड़ियों को अंजाम देते होंगे। मगर, ऊर्जा निगम के अफसर ऐसे मामलों की तह तक जाने की बजाय सिर्फ उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

आधा दर्जन लाइनमैनों के भरोसे शहर
शहरी क्षेत्र में निगम के 33 केवी के छह बिजलीघर हैं। इनमें से दो बिजलीघर रामनगर में, जबकि एक-एक हिमालयन, नंबर छह, धनौरी और ब्रहमपुर में लगे हैं। सोलानीपूरम बिजलीघर तैयार होने के बाद यह आंकड़ा सात तक पहुंच जाएगा। लेकिन, सभी बिजलीघरों पर निगम के अपने सिर्फ छह लाइनमैन ही तैनात हैं। क्षेत्र बड़ा होने के कारण संविदा और ठेकेदार के कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

कोट
निगम में कर्मचारियों का टोटा है। इसी वजह से संविदा कर्मचारियों, एजेंसी और ठेकेदार के लोगों से काम कराया जाता है। ये कर्मी निगम के अधिकारियों और स्थाई कर्मचारियों की देखरेख में ही काम करते हैं। स्टाफ की कमी दूर करने को ऊर्जा भवन को लिखा जा चुका है।
- सईद अहमद, डीजीएम, ऊर्जा निगम रुड़की।

Spotlight

Most Read

Hapur

अब जिले में नहीं कटेंगे बूढ़े हो चुके फलदार वृक्ष

अब जिले में नहीं कटेंगे बूढ़े हो चुके फलदार वृक्ष

22 जनवरी 2018

Related Videos

हरिद्वार जिला जेल से मिली ये जानकारी आपको चौंका देगी

उत्तराखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल हरिद्वार जिला जेल में 16 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं।

24 दिसंबर 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper