तीन बच्चों की मौत, डेंगू की आशंका

Haridwar Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। डेंगू से तीन मौत की सूचना पर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा रहा। शनिवार को रुड़की, लक्सर और हरिद्वार में डेंगू से मौत की सूचना मिली थी। जिसपर रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जाकर पड़ताल की। इसके अलावा रविवार को तीन मौत होने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिली। सभी मृतकों में डेंगू की आशंका जताई जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से मौत की किसी भी घटना की पुष्टि नहीं की है।
गैंडीखाता गुजरबस्ती में तीन बच्चों की मौत हो गई है। ग्रामीण मौत का कारण डेंगू बता रहे हैं। मरने वाले तीनों बच्चों में से चार वर्षीय रजिया शहर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती थी। नर्सिंग होम की ओर से दी गई सूचना पर रविवार को आईडीएसपी की टीम पहुंची। लेकिन तब तक परिजन बच्ची को लेकर जा चुके थे। इस दौरान अस्पताल के डाक्टर टीमा को कोई रिपोर्ट नहीं सौंप सके। इसके अलावा गैंडीखाता गुजरबस्ती की ही पांच वर्षीय अल्तिया और चार साल की जैनब की भी रविवार को जौलीग्रांट ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। आईडीएसपी के ऐपिडेमेलॉजिस्ट डा. नवनीत किशोर का कहना है तीन बच्चियों के मौत के कारणों की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। सोमवार को गांव जाकर जांच की जाएगी। दूसरी ओर शनिवार को स्वास्थ्य विभाग को लक्सर और हरिद्वार के खन्नानगर इलाके में डेंगू के चलते मौत की सूचना मिली थी। डा. नवनीत का कहना है दोनों की जगहों पर टीम ने जाकर जांच की, डेंगू से मौत से संबंधित कोई रिपोर्ट नहीं मिली। ऐसे में डेंगू से मौत नहीं हुई, मौत के अन्य कारण रहे हैं।

रावली महदूद में तीन संदिग्ध मरीज मिले
रावली महदूद गांव में रविवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य शिविर जारी रहा। शिविर में रविवार को 12 रोगियों का उपचार किया गया। जबकि डेंगू के दो संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं। गांव में शिविर अभी जारी रहेगा।

सेहत के साथ जेब पर भी भारी डेंगू का ‘डंक’
प्राइवेट अस्पतालों में जांच और इलाज महंगा
डेंगू की रैपिड किट जांच ही 600 से 700 की
सरकारी अस्पतालों में निशुल्क डेेंगू की जांच
हरिद्वार। सेहत के साथ डेंगू का डंक जेब पर भी भारी पड़ रहा है। फिजिशियन नहीं होने से लोग सरकारी अस्पताल में इलाज कराना पसंद नहीं कर रहे। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों महंगे इलाज का भार झेलना पड़ रहा है। आलम यह है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त में होनी वाली डेंगू की जांच पर बाजार में हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं। सरकारी अस्पताल में दवाएं सहित जो अन्य सुविधाएं निशुल्क मिल सकती थीं, प्राइवेट में मरीजों को भी खर्च उठाना पड़ रहा है।
रुड़की और हरिद्वार में डेंगू से पीड़ित लोगाें को करीब 200 संभावित मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से 36 रोगियों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। सबसे ज्यादा मामले रुड़की के माहीग्रान और हरिद्वार के रावली महदूद गांव से हैं। स्थिति यह है कि ज्यादातर मरीज सरकारी के बजाय प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। लोगों का तर्क है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। सरकारी अस्पताल में जो इलाज मुफ्त में मिल सकता था, उसके लिए लोगाें को प्राइवेट अस्पताल में डेंगू का इलाज काफी महंगी कीमत चुकानी पड़ रही। जिले में रुड़की सिविल अस्पताल तथा हरिद्वार जिला अस्पताल में डेंगू के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं। इन अस्पतालों में जहां एक्का दुक्का मरीज आ रहे हैं। वहीं प्राइवेट में इलाज कराने वालों की संख्या अधिक है।
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टेस्ट प्राइवेट में सरकारी में
डेंगू रैपिड किट 600 से 1200 निशुल्क
एलायजा 1600 से 2200 निशुल्क
प्लेटलेट काउंट 100 से 120 24 रुपये
सीबीसी 300 से 400 97 रुपये

प्लेटलेट्स के दाम प्रति यूनिट रुपये-
सरकारी ब्लड बैंक - निजी ब्लड बैंक
250 रुपये - 600 से 800 रुपये

डेंगू का इलाज जटिल नहीं है। इसके लिए फिजिशियन या अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक की खास आवश्यकता नहीं है। मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज को आना चाहिए। यहां निशुल्क और बेहतर सुविधाएं हैं। प्राइवेट में इलाज कराने में मरीजों की जेब कट सकती है।
- डा. नवनीत किशोर, ऐपिडेमेलॉजिस्ट

गंभीर अवस्था में विशेषज्ञ डाक्टर की जरूरत पड़ सकती है। वैसे भी प्राइवेट अस्पताल भी गंभीर मरीजों को रेफर करते हैं। इसलिए मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज को आना चाहिए। यहां डेंगू पीड़ितों के लिए बेहतर सुविधाएं हैं।
डा. दीपा शर्मा, सीएमओ

संक्रामक रोगों से निपटने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम
हरिद्वार। रविवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चिकित्सा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं की एक बैठक हुई। बैठक में कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष व्यक्त किया। बैठक को संबोधित करते हुए प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. केपीएस चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग डेंगू एवं स्क्रब टायफस रोग से निपटने में नाकाम साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि शहर में साफ सफाई की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अब भी स्वास्थ्य विभाग सक्रिय नहीं हुआ तो चिकित्सा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के विरोध में आंदोलन करेंगे। बैठक में शहर में फागिंग कराने की मांग अपर अधिकारी से की गई।

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