डेढ़ लाख बच्चाें पर पड़ेगी सर्द जमीं की मार

Haridwar Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। मौसम करवट बदल रहा है और सर्दियों ने दस्तक दे दी है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अभी तो हंसी-खुशी विद्यालयों में पहुंच रहे हैं। लेकिन एक माह बाद जब कड़ाके की ठंड पड़ेगी तो सर्द जमीं पर घंटों टाटपट्टी पर बैठकर उनकी हंसी काफूर हो जाएगी। फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध न होने से जिले के नौ सौ स्कूलों के करीब डेढ़ लाख बच्चों को टाटपट्टी पर बैठकर ही सर्दियां काटनी होंगी। वहीं, शिक्षा विभाग एक तरफ तो विद्यालयों की व्यवस्थाओं पर करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन बच्चों को ठंड से बचाने के लिए उसके पास कोई योजना नहीं है।
प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलाें में पढ़ाई व्यवस्था और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन ठंड से बचाने के लिए बच्चों को कुर्सी-मेज मुहैया कराने के लिए न तो विभाग के पास बजट है और न ही कोई योजना। जिले में करीब 700 प्राथमिक विद्यालय और 200 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या डेढ़ लाख से ऊपर है। विभाग की ओर से इन बच्चों के लिए बैठने के लिए टाटपट्टी की व्यवस्था की गई है। गर्मियों में तो यह व्यवस्था ठीक है, लेकिन कड़ाके की ठंड में सर्द जमीं की ठिठुरन मासूम बच्चों की हड्डियाें तक में सिहरन पैदा कर देती है। शायद गुरुजी और शिक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों को इसका अहसास नहीं होता है। क्योंकि उनके लिए तो कुर्सी की व्यवस्था रहती है। वहां न बजट आड़े आता है और न ही फर्नीचर की डिमांड भेजने में कोई तकनीकी बाधा। अभी तो ठंड ने दस्तक ही दी है। असल दिक्कत तो दिसंबर और जनवरी माह कंपकंपाती ठंड से होगी। लेकिन विभागीय अधिकारी कोई इंतजाम करने के मूड में नहीं दिख रहेेे हैं।

मजबूरी में कर रहे सरकारी स्कूलों का रुख
एक तरफ जहां कान्वेंट स्कूलाें में भवन के साथ फर्नीचर उनके स्टेटस को बढ़ाता है। वहीं, सरकारी स्कूलों के बच्चाें के लिए इस आधुनिक युग में टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ाई करना किसी अपमान से कम नहीं है। अभिभावक सुनील कुमार का कहना है सरकारी स्कूलाें की दशा देखकर गरीब मां-बाप भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलाें में पढ़ाने की चाह रखते हैं। ऐसे में मजबूरी में ही अभिभावक सरकारी स्कूलाें में बच्चों को भेज रहे हैं।

ठंड से होने वाली बीमारियां
- नजला-जुकाम
- निमोनिया, पसली चलना
- गले में खरास
- हाथ-पैर और होठों का फटना
- शरीर में ऐंठन।

प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलाें में फर्नीचर की सुविधा नहीं है। क्योंकि अब तक विभाग के पास फर्नीचर के अलग से बजट की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए पंचायत स्तर पर व्यवस्था की जानी चाहिए। विभाग की ओर से भी इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- डा. रामकृष्ण उनियाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार

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