आवासीय विद्यालयों में धीमी पड़ी चूल्हों की आंच

Haridwar Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। सब्सिडी वाले रसोई गैस के सिलेंडरों की संख्या सीमित होने के बाद कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में चूल्हों की आंच धीमी पड़ने लगी है। स्कूलों को अब 1171 में सिलेंडर मिल रहा है, जबकि पहले 400 रुपये में गैस मिल जाती थी। ऐसे में ईंधन का खर्च लगभग तीन गुना बढ़ जाने से छात्राओं के लिए खाना पकाना मुश्किल हो रहा है। विद्यालय प्रशासन पसोपेश में है कि पुराने बजट में कैसे रसोई को मैनेज किया जाए, लेकिन सरकार की ओर से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
निर्बल वर्ग की लड़कियों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से जिले में छह कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खोले गए थे। इन छह स्कूलों में करीब 420 छात्राएं अध्ययनरत हैं। छात्राओं को निशुल्क शिक्षण के साथ आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन अब इन विद्यालयों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो रहा है। यह समस्या खड़ी हुई है सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या समिति होने से। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के लिए अब तक जो सिलेंडर मिल रहा था उसका रेट 400 रुपये था। सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित होने के बाद अब एक सिलेंडर 1171 रुपये का हो गया है। यानी प्रति सिलेंडर 771 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। हरिद्वार जिले में बाजूहेड़ी, बादीवाला, मोहितपुर, हरजौली, अकरपुरउद और रानीमाजरा में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं। बाजूहेड़ी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बात करें यहां 64 छात्राएं हैं। इस विद्यालय में प्रतिमाह औसतन 10 गैस सिलेंडर खाना बनाने में लगते हैं। दो माह पूर्व यह सिलेंडर चार हजार रुपये में आ जाते थे। लेकिन सिलेंडरों के रेट बढ़ने के बाद अब ईंधन का खर्च चार हजार से बढ़कर लगभग 12 हजार हो गया है। जबकि सरकार की ओर से अब भी 400 रुपये के हिसाब से ही सिलेंडर का बजट आ रहा है। ऐसे में विद्यालय प्रशासन को खर्चा पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

30 रुपये है प्रति छात्रा की डाइट
सिर्फ रसोई गैस ने ही विद्यालय प्रशासन की मुश्किल नहीं बढ़ाई, अन्य वस्तुओं की महंगाई से भी दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। बाजार में जहां 30 रुपये में नाश्ता भी मिलना मुश्किल है, वहीं इतनी धनराशि में यहां की छात्राओं को पूरे दिन का खाना खिलाया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में एक छात्रा के लिए प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से खर्च मिलता है। 30 रुपये में नाश्ता, लंच और डिनर शामिल है। इससे समझा जा सकता है कि कैसे काम चलाया जा रहा होगा।

लकड़ियां जलाकर बना रहे खाना
सिलेंडर के रेट बढ़ जाने से उन्हें खरीद पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में लकड़ियों को जलाकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बाजूहेड़ी की वार्डन गीता नेगी ने बताया कि सिलेंडर महंगे होने की वजह से लकड़ियां जलाकर काम चलाया जा रहा है। लकड़ियां भी काफी महंगी पड़ रही है। इससे काफी मुश्किल हो रही है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की छात्राओं के लिए जो बजट आ रहा है वह काफी कम है। खाद्य सामग्री के रेट भी काफी बढ़ गए हैं। सिलेंडरों के रेट लगभग तीन गुना बढ़ जाने से मुश्किल बढ़ गई हैं। इस संबंध में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - पवन कुमार सैनी, सीआरसी समन्वयक बेलड़ा

सिलेंडरों के रेट बढ़ गए हैं। जिससे ईंधन खर्च तीन गुना बढ़ गया है। इस संबंध में शासन को लिखा जा चुका है। जल्द ही आवासीय विद्यालयों के लिए ईंधन खर्च में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
- डा. रामकृष्ण उनियाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार


मिड-डे मील का भोजन पकाना भी महंगा
रुड़की। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का खाना पकाना भी अब मुश्किल होने लगा है। सिलेंडर महंगे हो जाने से शिक्षक अब लकड़ियां जलवाकर मिड-डे मील का भोजन बनवा रहे हैं। दरअसल गैस सिलेंडरों का रेट स्कूलों के लिए 400 रुपये से बढ़कर 1171 रुपये हो गया है। लेकिन शिक्षा विभाग ने अब तक भी सिलेंडरों को लेकर आने वाले बजट में बढ़ोतरी नहीं की है। इस कारण स्कूलोें में मिड-डे मील का खाना गैस सिलेंडरों पर बनाना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि अब शिक्षक गैस सिलेंडर के बजाए लकड़ियां जलाकर मिड-डे मील का भोजन बनवा रहे हैं।

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