22 लाख लेकर पीएनबी का हेड कैशियर गायब

Haridwar Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
लक्सर। कस्बा स्थित पंजाब नेशनल बैंक का हेड कैशियर ऊर्जा निगम के 22 लाख से ज्यादा रुपये लेकर गायब हो गया है। कैशियर के गायब होने से बैंक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। बैंक अधिकारियों की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने कैशियर के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
21 अक्तूबर को ट्रक आपरेटर यूनियन लक्सर के अध्यक्ष अरुण मोहन जोशी बैंक के मुख्य प्रबंधक वीके गुप्ता से मिले और शिकायत की कि उन्होंने 30 हजार रुपये कई दिन पहले यूनियन के खाते में जमा कराए थे, लेकिन अब तक यह पैसा खाते में ट्रांसफर नहीं हुआ। उन्होंने जमा करने की बैंक की रसीद भी दिखाई। मुख्य प्रबंधक ने जब खाता चेेक किया तो उसमें कोई पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ था। अभी यह जांच चली रही थी इतनी देर में बैंक के मुख्य प्रबंधक को ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता गौरव शर्मा का एक पत्र डाक से आया। जिसमें लिखा गया था कि विभाग के कैशियर ने छह से 28 अगस्त के बीच में 22 लाख 32 हजार रुपये जमा कराए गए थे, लेकिन आज तक यह पैसा विभाग के खाते में ट्रांसफर नहीं हुआ। इस पत्र के बाद अधिकारियों के कान खड़े हो गए। आनन-फानन में खाते चेक किए गए तो यह लाखों रुपया भी ट्रांसफर नहीं हुआ था। इसके बाद अधिकारियों को कैशियर की भूमिका पर शक हुआ। बताया गया कि कैशियर राजेंद्र कुमार 18 अक्तूबर से बिना बताए गायब चल रहा है। जब कुछ कर्मचारियों को उनके आवास पर भेजा गया तो पता चला कि वह अपने बच्चों से सहित 18 अक्तूबर को यहां से कहीं चला गया। बैंक के मुख्य प्रबंधक वीके गुप्ता ने घटना से बैंक के मंडलीय प्रबंधक पीके गुप्ता और लीड बैंक के प्रबंधक प्रतीक श्रीवास्तव को अवगत करा दिया। बैंक अधिकारियों ने कैशियर राजेंद्र कुमार को निलंबित कर उसके खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी। कोतवाली पुलिस ने कैशियर के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कर लिया है। कैशियर राजेंद्र सिरसा हरियाणा का रहने वाला है। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ आ रहा है।

सीरियल नंबर नहीं डाले थे रसीद पर
बताया जा रहा है कि कैशियर ने ऊर्जा निगम और ट्रक यूनियन से जो पैसा लिया उसके बदले में दी जाने वाली रिसीविंग रसीद पर सीरियल नंबर नहीं डाला था। मुख्य प्रबंधक वीके गुप्ता का कहना है कि सीरियल नंबर डालने से यह बात पकड़ में आ जाती है कि आज कितने लोगों ने धन जमा कराया है। इसलिए वह पैसा तो लेता रहा लेकिन जमा नहीं कराया और पकड़ में नहीं आ सका।

निगम को दो महीने में आई याद
वर्तमान समय में बैंकों में पैसा 24 घंटे के भीतर एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर हो जाता है। लेकिन ऊर्जा निगम का पैसा दो महीनों बाद भी ट्रांसफर नहीं हुआ और अधिकारी चुप्पी साधेे रहे। यदि विभाग समय पर हरकत में आया होता तो कैशियर अब तक पकड़ा जा चुका होता। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता गौरव शर्मा का कहना है कि इसमें विभाग के अकाउंटेंट की गलती सामने आई है।

बाजार से करोड़ों उठाने की चर्चा
बैंक के कैशियर ने ऊर्जा निगम और ट्रक यूनियन को ही चपत नहीं लगाई, बल्कि बाजार के करीब दस लोगों से दो करोड़ रुपये उठाए थे। जानकारी के अनुसार, कैशियर राजेंद्र ने कुछ समय पहले 20 प्रतिशत ब्याज पर देने के लिए बाजार के कुछ लोगों से पैसे उठाए थे। बताया जाता है कि शुरू में राजेंद्र कुमार ने लोगों को 20 प्रतिशत व्याज के साथ मूल धनराशि भी लौटाई। इसी लालच में कई लोगों ने उसको लाखों रुपया दे दिया। बताया जाता है कि यह धनराशि दो करोड़ के आसपास है। कैशियर को पैसे देने वाले लोग भी अब उसकी तलाश में जुटे हैं।

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