बिना ‘हथियार’ डेंगू से लड़ाई

Haridwar Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। जिले में डेंगू का डंक लोगों को अपना शिकार बना रहा है। जनपद में अब तक इसके 162 संभावित मामले आ चुके हैं। इनमें से 34 की पुष्टि भी हो चुकी है। जबकि 80 पीड़ितों के खून के नमूनों की पुष्टि बाकी है। इतना सबकुछ होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के पास इससे लड़ने को जरूरी ‘हथियार’ तक नहीं हैं। पूरे जिले में फिजिशयन नहीं। जिला और रुड़की के अस्पताल में पैथोलॉजी सेल काउंटर, ब्लड बैंक में सैपरेटर मशीन भी नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बिना ‘हथियार’ के ऐसी जानलेवा बीमारी से कैसे मुकाबला किया जाएगा। फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को राहत देने के लिए डेंगू प्रभावित रुड़की के माहीग्रान और हरिद्वार के रावली महदूद गांव में शिविर लगाया हुआ है।
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‘तीन मिनट की जांच में लग रहे घंटों’
रुड़की स्थिति सिविल अस्पताल और जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में सेल काउंटर मशीन नहीं है। जिसके कारण पैथोलॉजी कर्मी करीब 20 साल पुरानी न्यू बार चैंबर विधि से प्लेटलेट काउंट टेस्ट कर रहे हैं। इस विधि में एक सैंपल के टेस्ट में कम से कम 45 मिनट से एक घंटे तक लग रहा है। जबकि सेल काउंटर मशीन में महज तीन से पांच मिनट में जांच हो जाती है। रुड़की सिविल अस्पताल में तकरीबन 65 मरीजों की प्लेटलेट जांच इस विधि से हो चुकी है। जबकि जिला अस्पताल हरिद्वार में 30 से अधिक मरीजों की प्लेटलेट जांची गई है। सिर्फ मेला अस्पताल में ही सेल काउंटर मशीन है। जिला अस्पताल इसके लिए मेला अस्पताल से मदद ले रहा है। लेकिन, रुड़की में पैथोलॉजी कर्मी प्लेटलेट जांच के लिए पुरानी विधि के ही भरोसे हैं। ऐसे में जहां समय नष्ट हो रहा है वहीं मरीजों के प्लेटलेट काउंट का पता नहीं चलने से इलाज प्रभावित हो रहा है।
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डेंगू में जांच महत्वपूर्ण
डेंगू पीड़ित की कई स्तरों पर खून की जांच होती है। सबसे पहले डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर पहली जांच डेंगू रैपिट किट से होती है। इसमें डेंगू पॉजीटिव या नेगेटिव की रिपोर्ट आती है। इसके बाद ही मरीज का इलाज शुरू होता है। डेंगू में मरीज के रक्त से प्लेटलेट की संख्या कम होती जाती है। इसे जानने के लिए पीड़ित के रक्त की प्लेटलेट काउंट जांच की जाती है। जांच में प्लेटलेट की संख्या ज्ञात होती है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज चलता है।
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दून रेफर किए जा रहे रोगी
सामान्य मरीज में प्लेटलेट की संख्या डेढ़ लाख से अधिक होनी चाहिए। अगर पीड़ित में प्लेटलेट कम हो जाते हैं तो उसे प्लेटलेट चढ़ाने की सख्त जरूरत पड़ती है। लेकिन, विडंबना है कि रुड़की हो या हरिद्वार ब्लड बैंक, कहीं प्लेटलेट नहीं मिल पा रहे। दरअसल, ब्लड बैंक में सैपरेटर ही नहीं है। इसकी मदद से रक्त से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग किए जाते हैं। जिले में प्लेटलेट न मिलने के चलते ऐसे मरीजों को जिनकी प्लेटलेट काफी कम हैं, उन्हें दून अस्पताल देहरादून रेफर किया जा रहा है। रुड़की और हरिद्वार से 15 से अधिक डेंगू पीड़ित मरीज दून रेफर किए जा चुके हैं।
कोट
-पहले जिले में एक पैथोलॉजिस्ट थे। ऐसे में मशीनें मांगने का कोई आधार ही नहीं था। लेकिन, मौजूदा समय में तीन पैथोलॉजिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसे देखते हुए सिविल अस्पताल और जिला अस्पताल में सेल काउंटर मशीन लगाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। आने वाले समय में जिले में पर्याप्त पैथोलॉजी उपकरण होंगे।
डा. दीपा शर्मा, सीएमओ हरिद्वार

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