अपना दोष कालेजों के मत्थे मढ़ रहा विवि

Haridwar Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। निजी बीएड कालेज एसोसिएशन ने 12 बीएड कालेजों को संबद्धता नहीं दिए जाने को गढ़वाल विश्वविद्यालय की लेटलतीफी का परिणाम बताया है। संबद्धता विस्तारण को निरीक्षण नहीं कराने की दलील को भी एसोसिएशन ने खारिज करते हुए कहा है कि यह अधिकार विवि का है। यदि विवि ने निरीक्षण नहीं कराया तो इसमें कालेजों का क्या दोष? एसोसिएशन ने प्रदेश में बीएड को लेकर छात्रों के हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
गढ़वाल विवि की ओर से संबद्धता से वंचित किए गए प्रदेश के 12 कालेजों में से रुड़की क्षेत्र के पांच कालेज हैं। निजी बीएड कालेज एसोसिएशन ने पत्रकारों से बातचीत में गढ़वाल विवि की कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया। एसोसिएशन के प्रदेश सचिव सुनील अग्रवाल, पीके अग्रवाल एवं प्रदीप जैन ने बताया कि विवि ने संबद्धता नहीं दिए जाने के पीछे कालेजों द्वारा विगत सत्र में निरीक्षण नहीं कराए जाने को कारण बताया है। जबकि निरीक्षण कराना या नहीं कराना विवि का अधिकार है। संबंधित कालेजों में विवि ने निरीक्षण पैनल ही गठित नहीं किए तो पैनल कराने का औचित्य नहीं बनता है। विवि प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित करने के बाद भी निरीक्षण प्रक्रिया पूर्ण कराने में लेटलतीफी करता है। जिसके चलते कालेज और छात्राें में मान्यता को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

‘विवि को नहीं डीएफिलेशन का अधिकार’
एसोसिएशन के सचिव सुनील कुमार का कहना है कि केंद्रीय गढ़वाल विवि की धारा 4(एफ) में एफीलिएशन एवं डीएफिलेशन का नियम ही नहीं है। यही कारण है कि केंद्रीय व्यवस्था में आने के बाद विवि ने किसी नए कालेज को एफिलेशन नहीं दी। ऐसे में विवि को डीएफिलेशन का भी अधिकार नहीं है। यह भी स्पष्ट है कि विवि निरीक्षण नहीं कराए जाने को डिएफिलेशन प्रक्रिया से नहीं जोड़ सकता।

150 छात्रों का क्या होगा अब
संबद्धता नहीं दिए जाने वाले कालेजों में प्रत्येक में औसतन 30-30 सीटाें पर प्रवेश लिए गए हैं। ऐसे में प्रवेश पाने वाले छात्राें के भविष्य पर तलवार लटक सकती है। एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि गढ़वाल विवि से इस संबंध में वार्ता की जाएगी। जल्द ही विवि को पत्र भेजा जाएगा। जिसमें संबद्धता जारी रखने का ठोस आधार प्रस्तुत कि या जाएगा। छात्रों के हित प्रभावित न हो, इसका पूरा प्रयास किया जाएगा।

सत्र शून्य होने के बाद भी नहीं मिले छात्र
एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि गढ़वाल विवि द्वारा सत्र विलंब करने के चलते इस बार 2011-12 का सत्र शून्य कर 2012-13 के लिए प्रवेश परीक्षा कराई गई। इसके बावजूद न तो समय पर प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया और न ही कट आफ मेरिट को लेकर स्थिति साफ की गई। इसके चलते प्रवेश परीक्षा में पर्याप्त छात्राें के शामिल होने के बाद भी कालेजों में अधिकांश सीटें खाली हैं। विवि द्वारा प्रवेश परीक्षा से लेकर संबद्धता देने और फिर कट आफ मेरिट जारी करने तक विलंब किया जाता है। जिससे प्रदेश में बीएड प्रवेश को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। विगत सत्र में भी यही स्थिति थी और वर्तमान में भी ऐसे ही हालात पैदा हो रहे हैं।

यूपी और हरियाणा का रुख कर रहे छात्र
गढ़वाल विवि की बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार दस हजार से अधिक छात्र सफल हुए। जबकि कालेजों में करीब पांच हजार सीटों पर प्रवेश होने थे। इसके बावजूद गढ़वाल विवि से संबद्ध कालेजों में 30 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर पाईं। कालेज प्रबंधकाें का कहना है कि गढ़वाल विवि की लेटलतीफी के चलते छात्रों को विश्वास स्थानीय कालेजाें से कम हो रहा है। इसके चलते छात्र ग्रेजुएशन करते ही यूपी तथा हरियाणा के कालेजों में दाखिला ले लेते हैं और प्रदेश के कालेजों की सीटें नहीं भर पाती हैं।

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