खत्म हो जाएगा मेला अस्पताल का अस्तित्व

Haridwar Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। अर्द्ध कुंभ 2004 से अस्तित्व में आया मेला अस्पताल का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसका भवन जिला अस्पताल के उपयोग में लाया जाएगा। रविवार को हरिद्वार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने इस बात का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मेला अस्पताल के भवन में जिला अस्पताल शिफ्ट किया जाएगा। जबकि जिला अस्पताल का भवन मेलों को दौरान इमरजेंसी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
रविवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने जिले डेंगू प्रभावित इलाकों का दौरान किया। इसके बाद वह दोपहर के समय डाम कोठी में पत्रकारों से मुखातिब हुए। मेला अस्पताल की बदहाली को लेकर पूछे गए पत्रकारों के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेला अस्पताल में जिला अस्पताल शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में वैधानिक रुप से मेला अस्पताल अस्तित्व में नहीं है। इसे वैधानिक अस्पताल का दर्जा देने के लिए कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। ऐसे में इस बात पर विचार किया गया है यहां जिला अस्पताल शिफ्ट किया। क्योंकि मेला अस्पताल 100 बैड क्षमता के साथ-साथ अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। ऐसे में जिला अस्पताल के रुप में अस्पताल के भवन एवं संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। उन्होंने बताया कि मेलों के दौरान जिला अस्पताल के भवन का इस्तेमाल इमरजेंसी के रुप में किया जा सकता है। यहां ट्रामा सेंटर बनाया जा सकता है।
विदित हो कि आठ अक्तूबर को मेला अस्पताल का निरीक्षण करेन पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि मेला अस्पताल बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने पीपीपी मोड के तहत अस्पताल को संचालित करने की बात कही थी।
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शिविर लगाकर इलाज करेगा स्वास्थ्य विभाग
प्रदेश में पहले चरण में 40 शिविर लगाने का प्रस्ताव
हरिद्वार।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती में असफल रहा स्वास्थ्य महकमा अब शिविर लगाकर विशेषज्ञों चिकित्सकों की कमी पूरी करने जा रहा है। यह काम निजी क्षेत्र के अस्पतालों की भागेदारी से कराने की तैयारी चल रही है।
डाम कोठी में पत्रकारों से बात करते हुए सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि यह बात किसी से छिपी नहीं है कि प्रदेश के तमाम सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र के बड़े अस्पतालों की सहायता ली जाएगी। उन्होंने बताया कि देश के नामचीन अस्पतालों की मदद से सरकारी अस्पतालों में सात दिवसीय शिविर लगाए जाएंगे। जिसके माध्यम से सभी प्रकार विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। प्रत्येक शिविर के लिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों को साढ़े आठ लाख रुपए दिए जाएंगे। शिविर में मोतीयाबिंद का आपरेशन से लेकर ओपन हार्ट सर्जरी, कीडनी ट्रांसप्लांट बड़े ऑपरेशनों की भी सुविधा मिलेगी। जिसका खर्च सरकार उठाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत निजी क्षेत्र के कई बड़े अस्पतालों में टेंडर डाल दिए हैं। जिन्हें जल्द खोला जाएगा और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रदेश में पहले चरण में 40 शिविर लगेंगे। जिसमें हरिद्वार में मेला अस्पताल, रुड़की सिविल अस्पताल तथा लक्सर सीएचसी के तीन शिविर शामिल हैं।
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हर जुबान पर रट गया मेला अस्पताल
हरिद्वार। जिले में मेला अस्पताल को स्पेशलिटी सेंटर के रुप में जाना जाता था। स्थिति यह है कि जिलेभर के लोग हो या खुद स्वास्थ्य विभाग अधिकारी कर्मचारी, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक समय मेला अस्पताल का नाम हर किसी की जुबान पर रट गया है। जिले के ज्यादातर बड़े मामले मेला अस्पताल रेफर किए जाते हैं। खासकर कुंभ मेलों के दौरान स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए मेला अस्पताल का बड़ा अहम योगदान रहा। बता दें कि वर्ष 2004 में अर्द्ध कुभ के समय 339.69 लाख रुपये की लागत से मेला अस्पताल का निर्माण किया गया था। कुंभ मेला 2010 में यह अस्पताल कई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ।

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