भूकंप से निपटने को वैज्ञानिक करेंगे मंथन

Haridwar Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। आईआईटी के अर्थक्वेक डिपार्टमेंट की ओर से इंडियन सोसाइटी आफ अर्थक्वेक टेक्नोलॉजी (आई सैट) के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 20 अक्टूबर को संगोष्ठी का आयोजन कर रही है। संगोष्ठी भूकंप अध्ययन के क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक भूकंप के खतराें को कम किए जाने के उपाय सुझाएंगे। पूर्व राष्ट्रीय सेस्मिक सलाहकार प्रो. आनंद स्वरूप आर्य बतौर मुख्य अतिथि संगोष्ठी को संबोधित करेंगे।
डिपार्टमेंट में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष और आई सैट के प्रेसीडेंट प्रो. एचआर वासन, सचिव मनीष श्रीखंडे और अजय चौरसिया ने बताया कि आई सैट की स्थापना रुड़की विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और प्राख्यात भूकंप वैज्ञानिक डा. जयकृष्ण ने किया था। आईसैट के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भूकंप के क्षेत्र में काम कर रहे देश भर के 60 से अधिक जाने माने वैज्ञानिक भूकंप के खतरों को कम करने पर मंथन करेंगे। दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान भूकंप के विभिन्न पहलुआें से संबंधित शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अंतर्गत सेस्मिक हैजार्ड, साइल स्ट्रक्चरल इंटरेक्शन, ग्राउंड मोशन, टेक्टोनिक्स, असेसमेंट एंड रिट्रोफिटिंग, साइट इफेक्ट एंड माइक्रोजोनेशन, स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स, डैमेज सर्वे आदि पर शोध का आदान प्रदान होगा।


उत्तराखंड में बड़े भूकंप से इंकार नहीं
रुड़की। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 20 अक्टूबर, 1991 की सुबह दो बजकर 35 मिनट पर 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था। इसका केंद्र उत्तर दिशा में 25 किलोमीटर की दूरी पर था। इस भूकंप में सैकड़ाें लोगों की जानें गई थी। साथ ही 80 प्रतिशत भवन क्षतिग्रस्त हुए थे। आईआईटी के अर्थ क्विक डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. एचआर वासन के मुताबिक विगत 11 वर्षों में राज्य में इतना बड़ा भूकंप नहीं आया है। आमतौर पर संवेदनशील क्षेत्राें में भूकंप के लंबे अंतराल के बाद भूगर्भ में हलचलाें से बनने वाली गैसें दबाव बनाती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।


आई सैट एक परिचय-
- देश की सेवा में पूर्ण किए 50 वर्ष।
- रुड़की विवि के पूर्व कुलपति ने किया था गठन।
- भूकंप तकनीक के क्षेत्र में करती है महत्वपूर्ण कार्य।
- मौलिक एवं प्रयोगात्मक पहलुआें, विधि, निर्देश एवं अनुसंधान की देती है जानकारी।
- उत्कृष्ठ शोध पर वैज्ञानिकों को सम्मानित करना।
- सोसायटी में 1670 सदस्य और 11 लोकल चैप्टर।

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