जनता की कमाई की जमकर हो रही लुटाई

Haridwar Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। जनता की गाढ़ी कमाई शहर में जमकर लुटाई जा रही है। उन सड़कों पर लाखाें रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है, जहां पहले से ही मलाईदार सड़कें बनी हुई हैं। पहले यह बजट खपाने का ‘खेल’ साकेत कालोनी में हुआ और अब आदर्शनगर में शुरू कर दिया गया है। जनता के विरोध के बावजूद बर्बादी का यह सिलसिला थमेगा भी या नहीं, इसका किसी को पता नहीं है।
आदर्श नगर में पीडब्ल्यूडी के ठेकेदारों ने बुधवार को एक अच्छी खासी सड़क को बिना तोड़े दोबारा बनाने का काम शुरू किया था। मोहल्ले के लोगों ने धन की बर्बादी बताकर इसका विरोध भी किया था। लेकिन फिर भी इसका निर्माण जारी है। यह सड़क तो मात्र दो से तीन लाख की लागत की है। लेकिन विभागीय अधिकारियों से जांच पड़ताल के बाद खुलासा हुआ है कि पूरे मोहल्ले में इस तरह के 38 लाख के कार्य होने हैं। ठेकेदारों को मिले बांड में इन सड़कों को खस्ताहाल दिखाया गया है और इन्हें उखाड़कर दोबारा बनाया जाना है। लेकिन हकीकत यह है कि ये सड़कें न तो खस्ताहाल हैं और इन्हें उखाड़ने के बजाय पुरानी सड़कों पर ही लीपापोती की जा रही है। इससे पूर्व पीडब्ल्यूडी ऐसा ही कारनामा साकेत कालोनी में दिखा चुका है। यहां अच्छी खासी सड़कों पर 50 लाख रुपये बर्बाद किए जा चुके हैं। लेकिन जनता की इस गाढ़ी कमाई की बर्बादी पर जवाब देने के लिए न तो विभागीय अधिकारी सामने आ रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि।

कौन है इस बर्बादी का जिम्मेदार
अच्छीखासी सड़कों को दुबारा बनाने के नाम पर हो रही इस बर्बादी के लिए कौन जिम्मेदार है? यह एक बड़ा सवाल है। दरअसल, राज्य योजना के तहत करीब एक वर्ष पहले पूर्व विधायक की संस्तुति पर लाखों रुपयों का बजट जारी हुआ है। अब यह पैसा लैप्स न हो तो इसे ठिकाने लगाया जाना जरूरी है। लेकिन किसी भी सड़क निर्माण से पूर्व पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर इस्टीमेट दिया जाता है। लेकिन इसमें पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। विभागीय अधिकारी इसके लिए जनप्रतिनिधियों को दोष देते हैं। उनका कहना है कि वार्ड सभासद और विधायक की संस्तुति के आधार पर उन्हें कार्य कराने पड़ते हैं। वहीं, सभासद और विधायक का कहना है कि जनता उनके पास समस्या लेकर आती है तो उन्हें सिफारिश करनी पड़ती है।

विरोध के बावजूद सड़क बनाने की जिद पर अड़े ठेकेदार
जनता सड़क बनाने का विरोध कर रही है और ठेकेदार हैं कि सड़क बनाने की जिद पर अड़े हैं। साकेत कालोनी और आदर्शनगर में यह उदाहरण देखने को मिला है। यहां के लोगों ने न केवल ठेकेदार के समक्ष विरोध जताया बल्कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से भी इसे रोकने की गुहार लगाई। जनता धन की बर्बादी पर रोती नजर आई, लेकिन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों का दिल नहीं पसीजा। नतीजतन अच्छी खासी सड़कें उखाड़ी गईं और बनाई भी गईं। आखिरकार राज्य योजना के तहत जारी लाखों रुपये ठिकाने लगा ही दिया गया।

जहां जरूरत है वहां बने सड़कें
जनता का कहना है कि विभाग को यदि सड़कें बनाने का इतना ही शौक हैं तो उन जगहाें पर जाकर झांके जहां पर सड़कों में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में सड़कें नजर आ रही हैं। चाव मंडी निवासी शैलेश बंसल का कहना है कि सड़क निर्माण का कार्य सिफारिशों के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक स्थिति के अनुसार होना चाहिए। वहीं गणेशपुर निवासी रितेश गुप्ता का कहना है कि जहां सड़कें नहीं हैं वहां अधिकारी झांकने तक में शर्म महसूस करते हैं। वहीं, अच्छीखासी सड़कों को दुबारा बनाने में दिलचस्पी दिखाई जा रही है।


क्या कहते हैं अधिकारी
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता चंद्रशेखर कौशिक का कहना है कि राज्य योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत हुए बजट के तहत सड़कों को उखाड़कर दोबारा बनाए जाने का काम चल रहा है। जनप्रतिनिधियों का दबाव होता है कि मोहल्ले के लोग सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं तो विभाग की ओर से काम शुरू करा दिया जाता है।

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