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प्रशासन ने संभाली कमान तो जायरीन भी मेहरबान

Haridwar Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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पिरान कलियर। साबिर पाक की दरगाह प्रबंधन की कमान जिला प्रशासन ने संभाली तो चढ़ावे के मामले में जायरीन भी मेहरबान होते नजर आ रहे हैं। पिछले साल जहां 37 गोलकों से मात्र 33 लाख 24 हजार रुपये मिले, वहीं इस साल अब तक खुली 21 गोलकों से ही 71 लाख 83 हजार रुपये का चढ़ावा प्राप्त हो चुका है। अभी 21 गोलकों की गिनती होनी बाकी है। उम्मीद है कि चढ़ावे का आंकड़ा शर्तिया एक करोड़ को पार कर जाएगा।
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साबिर पाक की दरगाह रुड़की शहर से सात किमी दूर पिरान कलियर में स्थित है। सालभर देश-विदेश के जायरीन यहां जियारत करने पहुंचते हैं। जियारत करने आने वाले जायरीन दरगाह परिसर में रखी गोलकों में चढ़ावा चढ़ाते हैं। पिछले साल तक दरगाह प्रबंधन का काम उत्तराखंड वक्फ बोर्ड करता रहा। भाजपा के शासनकाल में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद हाजी राव शराफत को नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के बाद से ही दरगाह के प्रबंधन पर अंगुलियां उठने लगी थी। लगातार विवाद चलता रहा। कलियर निवासी अनवर जमाल काजमी ने वर्ष 2011 में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। जिसमें दरगाह की बदइंतजामी के आरोप लगाए गए थे। 3 जनवरी 2012 को हाईकोर्ट ने दरगाह प्रबंधन का जिम्मा प्रशासन के हवाले करने के निर्देश दिए। 5 जनवरी को जिला प्रशासन ने दरगाह प्रबंधन की कमान अपने हाथ में ले ली। तब से जिला प्रशासन ही इसकी देखरेख में चल रहा है। गोलकोें पर सील लगाने और रुपयों की गिनती अधिकारियों की मौजूदगी में की जा रही है। दरगाह प्रबंधन का जिम्मा प्रशासन के पास आने के बाद उसकी आमदनी में भारी फर्क नजर आ रहा है। दरगाह में दूसरे व्यवस्थाएं भले न सुधरी हों लेकिन चढ़ावे में भारी फर्क नजर आ रहा है।
जिला प्रशासन की तरफ से तैनात प्रबंधक फुरकान अहमद का कहना है कि इस साल दरगाह परिसर में चढ़ावा चढ़ाने वालों के लिए कुल 42 गोलकें रखी गई थी। इसमें से 21 की गिनती हो चुकी है। जिसमें से अभी तक 71 लाख 83 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं।
समस्या बन रहे सड़े गले नोट
इस साल भी प्रशासन के लिए सड़े गले नोट समस्या बन रहे हैं। हालांकि पिछले साल की तुलना में यह भी काफी कम हैं। मालूम हो कि पिछले साल आठ लाख रुपये के सड़े-गले नोट मिले थे। इस बार भी अभी तक दो लाख रुपये के नोट सड़े गले हैं। बैंक इन नोटों को ले नहीं रहा है। प्रशासन ने फिलहाल इन्हें एक बोरे में भरकर सील कर रखा है। एएसडीएम कृष्ण कुमार मिश्रा का कहना है कि इस संबंध में आरबीआई से दिशा निर्देश लिए जाएंगे। जो भी निर्देश होंगे उनका पालन किया जाएगा।

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