कहीं मिर्क जैसे हादसे का इंतजार तो नहीं

Haridwar Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। जिले की करीब 115 फैक्ट्रियां अग्निशमन विभाग की एनओसी के बिना रही चल रही हैं। इन फैक्ट्रियों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने की जरूरत नहीं समझी या फिर एनओसी रिन्यूवल कराने नहीं आए। यह वह फैक्ट्रियां हैं, जिनमेें चार महीने पहले ही अग्निशमन विभाग की टीम ने सुरक्षा खामियां पकड़ी थी।
जिला उद्योग केंद्र के मुताबिक जनपद में करीब 1500 बड़ी-छोटी इकाइयां हैं। अग्निशमन विभाग की ओर से पहले तो कभी इन इकाईयों में आग से बचाव को लेकर कोई जांच नहीं की, लेकिन इसी साल फरवरी में मंडावली गांव के पास स्थित मिर्क इलेक्ट्रानिक्स फैक्टरी में बड़ा अग्निकांड हुआ। जिसमें 12 कर्मचारी जिंदा जल गए और पूरी फैक्टरी तबाह हो गई। मिर्क में हुए अग्निकांड के बाद अग्निशमन विभाग नींद से जागा। अग्निशमन की टीम ने मई में इकाइयों में सुरक्षा उपायों का जायजा लिया गया था। सिडकुल, हरिद्वार, बहादराबाद, लकसर, भगवानपुर आदि औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 322 कंपनियों में कोताही पायी गई थी। इन सभी कंपनियों को एनओसी लेने और लाइसेंस नवीनीकरण कराने का नोटिस जारी किया गया था। बावजूद इसके, अभी तक करीब 115 कंपनियों ने एनओसी लेने या रिन्यूवल कराने की जरूरत नहीं समझी। दमकल विभाग ने इन सभी इकाइयों को फिर से नोटिस जारी कर दिया है। वहीं जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से भी कंपनियों को रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

कागजी जमाखर्च तक सीमित दमकल विभाग
सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बजाए दमकल विभाग महज नोटिस भेजकर कागजी जमा खर्च करने में लगा है। नोटिस भेजने से आगे दमकल विभाग की कार्रवाई नहीं कर रहा है। हरिद्वार फायर स्टेशन ऑफिसर कैलाश चंद ने बताया कि दोबारा नोटिस पर भी कंपनी नहीं चेती तो लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

सरकारी विभागों की भी खुल गई पोल
आग से सुरक्षा उपाय के मामले में सरकारी विभागों की पोल भी खुल चुकी है। बुधवार को एसडीएम अरविंद कुमार पांडे ने तहसील स्थित कार्यालयों का निरीक्षण किया तो यहां पर एक्सपायर हो चुके अग्निरोधी यंत्र मिले। तहसील वह स्थान है, जहां दिन में हर समय हजारों लोगों की भीड़ रहती है। यहां पर महत्वपूर्ण अभिलेख भी रखे हैं। इसके बावजूद आग से बचाव के कोई उपाय नहीं हैं। तहसील ही नहीं अन्य कई सरकारी विभागों का हाल भी यही है।

कांप्लेक्सों में बचाव के रास्ते नहीं
शहर में तेजी से विकसित हो रहे कांप्लेक्सों में आग से बचाव का कोई रास्ता नहीं है। रानीपुर मोड़ के आसपास बने कांप्लेक्सों की सीढ़ियां संकरी हैं और आग लगने की स्थिति में भागने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है। यहां पर बिजली के तारों का जाल बिछा है। बीडी-सिगरेट फूंकने वाले भी कम नहीं हैं। आग लगने की स्थिति में यहां पर बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।

जिन कंपनियों ने एनओसी और लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराया है। उनको रिमाइंडर भेजकर जल्द कार्रवाई के लिए कहा जा रहा है। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
डीएस बांगड़ी, प्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र।

करीब 65 प्रतिशत इकाइयों ने नवीनीकरण करा लिया है। शेष को दोबारा नोटिस भेजा गया है। फिर भी इकाइयों की ओर से ढील बरती जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- कैलाश चंद, एफएसओ, हरिद्वार।

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