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हरित पट्टी विकसित किए बिना लग गए स्टोन क्रशर

Haridwar Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
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रुड़की। बंजारेवाला क्षेत्र में स्टोन क्रशर की अनुमति देने में भी मानकों की धज्जियां उड़ीं। मोटी कमाई के फेर में नियमों को ताक पर रखकर ऐसा किया गया। नियमाें के मुताबिक, स्टोन क्रशर की अनुमति से पूर्व कुल भूमि के 30 प्रतिशत हिस्से पर हरित पट्टी विकसित की जानी जरूरी है। हरित पट्टी होने के बाद ही पर्यावरण और वन विभाग एनओसी देता है। इसके बाद प्रशासन क्रशर लगाने की अनुमति देता है। लेकिन क्षेत्र में लगे अधिकांश स्टोन क्रशरों में इस मानक की अनदेखी की गई है। ऐसे में प्रशासन के साथ ही पर्यावरण और वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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किसी भी क्षेत्र में स्टोन क्रशर की अनुमति से पूर्व तहसील प्रशासन, पर्यावरण विभाग, वन विभाग और इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से अनुमति दी जाती है। अंतिम अनुमति से पूर्व सभी विभागों की रिपोर्ट भी लगाई जाती है। लेकिन बंजारेवाला क्षेत्र में लगे स्टोन क्रशर पर्यावरण संरक्षण के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नियमों के मुताबिक स्टोन क्रशर के लिए 30 बीघा भूमि की जरूरत होती है। अनुमति से पूर्व स्टोन क्रशर को इसके 30 प्रतिशत भूभाग पर हरित पट्टी विकसित करनी होती है। इस भूमि पर हरे पेड़ों को विकसित किया जाता है। लेकिन वास्तविक स्थिति इसके उलट है। क्षेत्र में लगे उत्तराखंड के 11 स्टोन क्रशरों में से सात में हरित पट्टी की अनदेखी की गई है। इन स्टोन क्रशरों पर दिखावे मात्र के लिए मात्र पांच से दस प्रतिशत भूभाग पर ही हरे पेड़ लगाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन स्टोन क्रशरों आखिर किस दबाव के चलते अनुमति प्रदान कर दी गई।

खनन क्षेत्र में ही लगा दिए स्टोन क्रशर
500 मीटर दूरी पर लगने का है प्रावधान
रुड़की। बंजारेवाला क्षेत्र में स्टोन क्रशराें की अनुमति से पूर्व खनन नीति का भी ख्याल नहीं रखा गया। नीति के मुताबिक कोई भी स्टोन क्रशर खनन क्षेत्र से 500 मीटर के दायरे के बाहर ही लग सकता है। लेकिन यहां भी प्रशासन ने दरियादिली दिखाई।
क्षेत्र में लगे 11 स्टोन क्रशराें में से आठ स्टोन क्रशरों को खनन क्षेत्र से 500 मीटर के दायरे के भीतर लगाया गया है। यही नहीं कुछ स्टोन क्र शर तो ऐसे हैं, जो खनन क्षेत्र से महज 200 मीटर दूरी पर ही है। ऐसे स्टोन क्रशर नदी से खनन करते हुए और अपना स्टॉक भरते गए। इससे करोड़ों रुपये की रायल्टी को तो चपत लगी ही, नदियों को भी बेतहाशा खोद दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियाें ने भी समय-समय पर क्रशराें को दौरा किया। लेकिन किसी ने भी इस खेल को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की।

खनन माफिया के विरोध में उतरे विधायक
सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
लक्सर। लक्सर विधायक संजय गुप्ता खनन माफिया के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने सरकार को 15 दिन में खनन के खेल को रोके जाने का अल्टीमेटम दिया है।
लक्सर विधायक संजय गुप्ता ने कहा है कि खनन माफिया क्षेत्र को खोखला कर रहे हैं और करोड़ों रुपये के वारे न्यारे कर रहे हैं। उन्होंने इस पूरे खेल में माफियाओं सहित स्टोन क्रशर स्वामी, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभगत होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में दिन रात जेसीबी से नदियों के कि नारे खनन हो रहा है और अवैध रूप से स्टोन क्रशरों में स्टॉक किया जा रहा है। पुलिस और अधिकारी मौन साधे हुए हैं। यह तब है जब राज्य में खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिन के भीतर राज्य सरकार इस पर अंकुश नहीं लगाती तो वे समर्थकों के साथ चक्का जाम करेंगे। जरूरत पड़ी तो विधानसभा का भी घेराव करेंगे।

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