नदी का उफान बहा ले जाता है रपटा

Haridwar Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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रुड़की। कई नदियाें से घिरा बुग्गावाला क्षेत्र हर साल बाढ़ और भारी बारिश की विभिषिका को झेलता है। शासन-प्रशासन को बरसात के दिनों में तटबंधों और रपटों की याद आती है। इसलिए ऊपरी तौर पर तो काम होता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निगल पाता। तेलपुरा के पास मोहंड रोह नदी पर बने रपटे की भी यही कहानी है। उफनती नदी में बहने वाले इस रपटे की लाखाें रुपये खर्च कर चार सालों में छह बार मरम्मत कराई जा चुकी है। मगर, नतीजा सिफर रहा। ग्रामीण रपटे की जगह पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी अनसुना कर रहे हैं।
बुग्गावाला क्षेत्र के तेलपुरा के पास मोहंड रोह नदी पर बना 400 मीटर लंबा रपटा 50 गांवों के लोगों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है। आपदा की घड़ी में लोग जरूरी सामान को तरस जाते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और कई गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाते हैं। करीब पांच साल पूर्व लोक निर्माण विभाग की देखरेख में एडीबी की टीम ने इस रपटे का निर्माण किया था। तब भी ग्रामीणों ने यहां पर पुल बनाने की मांग की थी। हर साल पहाड़ों पर बारिश के चलते नदी में उफान आता है और रपटा बह जाता है। पिछले पांच सालों मेें रपटे की मरम्मत को विभाग लाखों खर्च कर चुका है। इस बार ही इसकी मरम्मत के लिए आठ लाख रुपये जारी किए गए हैं। अब तेलपुरा के प्रधान कौसर अली, बुग्गावाला के प्रधान पुनेश्वर, हसनेवाला के प्रधान मुस्तकीम और बुधवा शहीद की प्रधान कविता चौहान की ओर जिलाधिकारी को पत्र भेजकर इस मार्ग पर पुल बनाए जाने की मांग की गई है। अब देखना है कि प्रशासन ग्रामीणों की इस मांग को कितनी तवज्जो देता है।

कोट
नदी पर रपटे की बजाय पुल ही कारगर है। जिस समय रपटा बना था। यदि उसी समय पुल बनाया जाता तो बेहतर होता। पुल बनाने के लिए अभी भी शासन स्तर से रिपोर्ट मांगी जा रही है। संभव है, कोई समाधान निकल जाएगा।
- एसके गुप्ता, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी

बोल जनता, सुनते नहीं अधिकारी
पुल बनाने की मांग को लेकर न जाने कितनी बार आला अधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन सभी आश्वासन देकर लौट जाते हैं। इस मामले को अब शासन स्तर पर उठाया जाएगा।
- बबीता, प्रधान बुधवा शहीद।

प्रशासन ने क्षेत्र के सैकड़ों गांव के लोगों को उपेक्षित कर दिया है। बाढ़ की विभिषिका हर साल झेलते हैं, लेकिन किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- संजय चौहान, ग्रामीण

रपटे की जगह पुल बने तो गांवाें के लिए बहुत बड़ी सौगात होगी। हर साल रपटे की मरम्मत पर खर्च होने वाला पैसा भी बचेगा और ग्रामीणों को भी सहूलियत होगी।
- मोहम्मद शमीम, ग्रामीण

रपटा बह जाता है तो खानापूर्ति के नाम पर बजरी सीमेंट डालकर उसकी मरम्मत कर दी जाती है। मरम्मत भी ऐसी कि मोहंड रोह में पानी आते ही यह फिर बह जाता है। आपदा की घड़ी में रपटा काम न आए तोे इसका फायदा ही क्या है।
- रिजवान अली, ग्रामीण

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