बरसात में मैली होने से नहीं बचती ‘गंगा’

Haridwar Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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हरिद्वार। गंगा को प्रदूषित होने से बचाने को देशभर में हो-हल्ला मचाया जाता रहा है। आसपास बसे शहरों, बस्तियों का कचरा गंगा में न जाए, इसके लिए अरबों रुपये खर्च कर व्यवस्थाएं बनाई गईं। सैकड़ों गंदे नाले टैप किए गए। मगर, बरसात में ये सभी इंतजाम बेअसर नजर आते हैं। गंगा मैया के सहायक नदी-नालों से सटी आबादी के कारण जमा कचरा और सैकड़ों क्यूसेक गंदा पानी रोज नदियों और रौ के मार्फत गंगा को मैला कर रहा है। जिसे रोकने के कोई प्रबंधन नहीं हैं। हालत यह है कि अब संबंधित महकमों ने भी मान लिया है कि वर्षा ऋतु में तो मां गंगा दूषित होंगी ही।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने को देशभर में शोर मचा तो भारत सरकार ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन कर गांगेय क्षेत्र के अनेक शहरों में अरबों रुपये की राशि विश्व बैंक की मदद से खर्च की। इसके तहत हरिद्वार के करीब 14 गंदे नाले भी टैप किए गए, ताकि इनमें बहने वाला नगर का मल-जल गंगा में न गिरे। तब वर्षा ऋतु में भी गंगा को दूषित होने से बचाने को ललतारौ, बागरौ, सूखरौ, रानीपुर रौ आदि के मुहानों पर फिल्टर प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया था। ताकि, बरसाती नदियों और रौ से गंगा में पानी तो आए, मगर इनमें बहकर आने वाली बस्तियों की गंदगी को रोका जा सके। लेकिन, यह योजना भी अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी। जिसका खामियाजा गंगा को भुगतना पड़ रहा है। हरिद्वार में ही सैकड़ों क्यूसेक गंदा पानी रोज गंगा में समा रहा है। ललतारौ पर नजर डालें तो नदी समूची बिल्वकेश्वर कालोनी, ब्रह्मपुरी, बाल्मीकि बस्ती, निर्मला छावनी आदि की गंदगी लेकर गंगा में पहुंचती है। चार महीनों तक अन्य सभी बरसाती नदियां और रौ भी गंगा को बुरी तरह प्रदूषित करती हैं। लेकिन, इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।

कोट
नई योजना बनाए बगैर समाधान नहीं
हरिद्वार। निर्माण और अनुरक्षण इकाई गंगा के प्रभारी महाप्रबंधक वाईके मिश्रा स्वीकारते हैं कि वर्षा ऋतु में गंगा काफी मैली हो जाती हैं। एक जमाना था जब बरसाती नदियां और रौ केवल सिल्ट लेकर गंगा में गिरती थीं। यह सिल्ट गंगा के बहुत काम आता था। लेकिन अब तमाम बरसाती रौ के किनारे दूर-दूर तक बस्तियां बस गई हैं। यहां बसे लोग और सफाई कर्मी तमाम गंदगी रौ में डालते हैं, जो वर्षा ऋतु में गंगा को प्रदूषित करती है। बकौल मिश्रा, व्यापक स्तर पर नई योजना तैयार किए बगैर गंगा को बरसाती प्रदूषण से मुक्त करना मुश्किल है।

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