बदहाल मैदान में कैसे तैयार होंगे उन्मुक्त चंद

Haridwar Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
रुड़की। होनहार खिलाड़ियों की धरती पर ‘उन्मुक्त चंद’ जैसे खिलाड़ी कैसे तैयार हों। जब प्रतिभा को तराशने के लिए खेल के मैदान जैसे संसाधन ही बदतर हो। सीके नायडू, वीनू माकंड और विजय हजारे कप सरीखी राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में शहर का परचम लहराने वाले खिलाड़ी ऊंचे दरजे की उपलब्धि हासिल करने से महरुम हैं।
अंडर-19 विश्व कप जीताने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले उत्तराखंड के ‘उन्मुक्त चंद’ ने जहां प्रदेश का नाम विश्व पटल पर अंकित कर दिया है। वहीं शहर के होनहार खिलाड़ियों को भी इसकी दरकार है। उत्तराखंड की अंडर-19 टीम से राष्ट्रीय स्तर की सीके नायडू कप खेल चुके नवीन नेगी, रोहित कुमार, अमन वर्मा, आशीष, राजन प्रताप, शिवम सैनी, असर फारुख। अंडर-16 टीम से वीनू माकंड कप खेल चुके राजेश तांगड़ी और अंडर-14 टीम से विजय हजारे कप खेल चुके धनंजय शुक्ला रुड़की के ऐसे नाम हैं, जिन्हें तैयारी के लिए भी ठीक से मैदान नहीं मिल पाया हो। लेकिन इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताआें में पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। फिर भी कहीं न कहीं कसक बाकि जरुर है। प्रोत्साहन तो दूर इन खिलाड़ियों को खेलने के लिए मैदान में जगह तलाशते रहते हैं। शहर के एकमात्र नेहरु स्टेडियम की बदहाली इनकी राह में हर बार रोड़ा बनती रहती है। अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत की जीत से एक ओर जहां यहां के युवा खिलाड़ियों में उत्साह का माहौल है। तो वहीं दूसरी ओर शहर के एकमात्र खेल के मैदान की बदहाली और प्रोत्साहन की कमी से निराशा छाई है।

आयोजनों से उखड़ रही मैदान की हरी घास
रुड़की। खेल आयोजन के बजाय अन्य आयोजनों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नेहरु स्टेडियम का वजूद खतरे में है। मैदान में उगी हरी भरी घास जगह-जगह से उखड़ गई है। बारिश के दिन खेल का मैदान कीचड़ से भर जाता है। घास की वजह से सही सलामत बचा मैदान का हिस्सा भी आयोजनों से उजड़ता जा रहा है। लेकिन खेल का जुनून लिए हर रोज यहां खिलाड़ी पहुंचते हैं। कीचड़, गड्ढे और उबड़ खाबड़ मैदान में तैयारी कर अपने आप अपने खेल को निखारने में जुट जाते हैं।

बदहाली की भेंट चढ़ गया था तैयारी कैंप
रुड़की। पिछले साल दिसंबर में नेहरु स्टेडियम में सीके नायडू कप का तैयारी कैंप नहीं लग सका। पिछले साल उत्तराखंड की 16 सदस्यीय अंडर-19 टीम में छह खिलाड़ी रुड़की से थे। इन्हें सीके नायडू कप खेलने दिल्ली जाना था, लेकिन इन खिलाड़ियों को तैयारी के लिए स्टेडियम नहीं मिल सका। स्टेडियम में एक आयोजन के चलते मैदान बदहाल हो गया। जिससे खिलाड़ियों को बिना पूर्व तैयारी के खेलने जाना पड़ा।

प्रदेश की अंडर-19 टीम का कप्तान रुड़की से
रुड़की। प्रदेश की अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान नवीन नेगी रुड़की से है। वह नेहरु स्टेडियम में क्रिकेट के गुर सीख रहे हैं। नवीन वर्ष 2011 तथा 2010 में दो बार सीके नायडू कप मे प्रदेश की टीम का नेतृत्व कर चुका है। नवीन की कप्तानी में पिछले साल उत्तराखंड ने सीके नायडू में दमन-द्वीप और पश्चिमी बंगाल की टीमों को हराकर क्वाटर फाइनल में जगह बनाई थी। लेकिन टीम केवीएस की टीम से हार गई थी। नेहरु स्टेडियम की बदहाली के चलते तैयारी नहीं कर पाए रुड़की के खिलाड़ियों का प्रदर्शन फिर भी काबिले तारिफ रहा।

बोले खिलाड़ी और कोच
नेहरु स्टेडियम में खेलने के लिए जगह ढूंढनी पड़ती है। आयोजनों के चलते कई बार तैयारी बाधित होती रहती है। स्टेडियम की दशा पर कोई ध्यान नहीं देता।
- शांतनु, युवा खिलाड़ी
प्रदेश स्तरीय खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन नहीं है। अपने पैसों से खिलाड़ी किट और कपड़े खरीदते हैं। तैयारी के लिए भी पर्याप्त सांसाधन नहीं मिल पाते हैं।
- विशाल शर्मा, खिलाड़ी
क्रिकेट में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। लेकिन प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। हाल यह है कि खेल के लिए मैदान नहीं मिल पाता। आखिर खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे।
- रोहित कुमार, युवा खिलाड़ी
रुड़की में खेल मैदानों का अभाव है। एकमात्र नेहरु स्टेडियम है। जिसे भी खिलाड़ियों से ज्यादा अन्य आयोजनों के लिए दिया जाता है। यह दुर्भाग्य का विषय है।
- हर्षमोहन संगल, युवा खिलाड़ी
जिन खिलाड़ियों में हमें प्रतिभा नजर आती है, उन्हें दिल्ली या पंजाब में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराते हैं, ताकि वे निखर सकें। क्योंकि प्रदेश में संसाधन की कमी है।
- पंकज शर्मा, क्रिकेट कोच
प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें तराशने जरुरत है। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन में हम पीछे रह जाते हैं। जिस कारण यहां के खिलाड़ी दूसरे प्रदेशों से खेल रहे हैं।
- चंद्रपाल वेदी, खेल प्रेमी

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