कीमती जमीन की कोई कीमत नहीं

Haridwar Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। वैसे तो नगर निगम की ये जमीनें बहुत कीमती हैं लेकिन सरकार की विभिन्न योजनाओं के लिए इन्हें मुफ्त में दे दिया जा रहा है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के नाम पर निगम की लगभग 800 बीघा भूमि देने का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया गया है। अभी इन जमीनों से निगम को लाखों रुपये की आमदनी हर माह किराये के रूप में हो रही है लेकिन जब ये जमीनें उसके हाथ से निकल जाएंगी तो आमदनी भी निकल जाएगी।
मिस्सरपुर में लगभग 70 बीघा भूमि राजीव आवास योजना के लिए प्रस्तावित है। सराय क्षेत्र के स्लेज फार्मों की भूमि को मुफ्त में दिया जा रहा है। लगभग 80 बीघा भूमि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए दी गई है। करीब 86 बीघा भूमि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रोजेक्ट के लिए दी जानी है। डीएम ने 300 बीघा भूमि हरिद्वार विकास प्राधिकरण की आवास योजना के लिए देना प्रस्तावित किया है। कुल मिलाकर निगम के हाथ से जल्द ही करीब 800 बीघा भूमि निकल जाएगी और साथ ही निकल जाएगी लाखों की आमदनी।

ईएसआई अस्पताल मिस्सरपुर में
ईएसआई अस्पताल के लिए मिस्सरपुर के स्लेज फार्म की 250 बीघा भूमि प्रस्तावित करके शासन के पास स्वीकृति के लिए भेजी गई है। जबकि केंद्र सरकार की यह योजना सिडकुल के लिए ही प्रस्तावित है। सिडकुल से 15 किलोमीटर दूर अस्पताल बनाने के औचित्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा
नगर निगम के कब्जे की जमीनों को तो प्रशासन आवंटित करता जा रहा है, लेकिन जिस जमीन पर सरकारी विभागों और दूसरे लोगों ने कब्जा है उसको खाली कराने की कोशिश नहीं की जा रही है। सहगल पेट्रोल पंप के पीछे लगभग 70 बीघा भूमि पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। चेयरमैन कार्यालय के पीछे से लेकर ईओ आवास के अगल-बगल से लेकर गैराज क्षेत्र की लगभग 150 बीघा जमीन पर भी कब्जा है। रेलवे क्रासिंग के पास की जमीन को खाली कराने के लिए पीपी एक्ट में वर्षों से मुकदमा चल रहा है। टीबड़ी में 50 बीघा से अधिक भूमि को लोगों ने बेचकर ठिकाने लगा दिया है। भीमगोडा एवं खड़खड़ी में अवैध कब्जा है। शहर की सबसे बेशकीमती आवासीय कालोनियां विचित्र वाटिका एवं देवपुरा कालोनी का भी यही हाल है।

यह हो सकता है विकल्प
नंबर एक
आवासीय अवैध कब्जों की जगह को राजीव आवास योजना के लिए उपयोग में लाया जा सकता था। भूमाफिया को यहां से भगा दिया जाए और जो गरीब आदमी कब्जा हटाने के दौरान उजड़ेंगे उन्हें राजीव आवास योजना में आवंटन के समय प्राथमिकता दी जा सकती है। इससे किसी गरीबों का आशियाना नहीं छिनेगा और निगम को राजीव आवास योजना के लिए भूमि भी मिल जाएगी।

नंबर दो
सिडकुल और बीएचईएल में कई जगह खाली जमीन पड़ी है। ईएसआई अस्पताल यहीं पर बनाया जाना उचित होगा। यह कर्मचारियों के लिए बनाया जा रहा है। इससे कर्मियों को अस्पताल नजदीक पड़ेगा और नगर निगम की भूमि बच जाएगी। जो भविष्य में किसी बड़े काम आ सकती है।

अभी तक नहीं बनी काबिजों की सूची
नगर निगम के अधिकारी, कुछ कर्मचारी काबिज लोगों से मिले हैं। इसका पता इस बात से चलता है कि मई में तत्कालीन जिलाधिकरी/प्रशासक नगर निगम ने निगम की जमीनों एवं आवासों पर काबिज लोगों की सूची बनाने के निर्देश दिए थे। इस काम के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनी थी। कमेटी को एक हफ्ते में रिपोर्ट देनी थी। इसके बाद बेदखली की कार्रवाई शुरू होनी थी, लेकिन काबिज लोगों की सूची अब तक नहीं बनी है।

पत्रावलियों की जांच की जाएगी
राजीव आवास योजना निगम की ही योजना है। उसके लिए भूमि निगम को ही देना है। अवैध कब्जों वाली विवादित जमीन का चयन किए जाने से योजना में विलंब होता। इसलिए निर्विवादित भूमि का प्रस्ताव किया होगा। जहां तक अन्य योजनाओं के लिए भूमि आवंटन का प्रश्न है उसकी पत्रावलियों की जांच कर उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा।
-हर्षवर्धन मिश्रा, अपर मुख्य नगर अधिकारी।

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