बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

और कहीं ‘दवा’ ढूंढते रह जाओगे

Haridwar Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
रुड़की। डाक्टर जो दवाएं लिखते हैं, वे उनके क्लीनिक या आसपास के मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं। अगर दूसरी जगह के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी है तो ढूंढते रह जाओगे। इधर से उधर चक्कर काटते थक जाओगे, लेकिन दूसरी जगह वह दवाई नहीं मिलेगी।
विज्ञापन

शहर में ज्यादातर डाक्टरों के क्लीनिक या नर्सिंग होम पर अपने मेडिकल स्टोर हैं। जिनके यहां नहीं हैं, उनके आसपास मेडिकल स्टोर जरूर होगा। मरीज डाक्टर को भगवान मानता है। डाक्टर पर्चे पर जिस ब्रांड नेम की दवा लिखते हैं, मरीज वहीं मांगता है। दरअसल, लोगों के मन में इस तरह का भ्रम बैठा हुआ है कि जो दवा डाक्टर ने लिखी वही कारगर है। दूसरी कंपनी की दवा असरदार नहीं है। मरीजों की इसी गलतफहमी का डाक्टर फायदा उठाते हैं। कमीशनखोरी के चलते ऐसी दवाएं लिखी जाती हैं, जिनसे अधिक लाभ मिलता है। चाहे मरीज उसे खरीदने की स्थिति में हो या नहीं। इससे डाक्टरों को कोई मतलब नहीं। लक्सर गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चंद्रशेखर सिंह आजाद का कहना है कि मरीज के लिए कौन सी दवा जरूरी है। यह डाक्टर बेहतर जानते हैं। लेकिन डाक्टर अपने इस हुनर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। मरीज को एक विशेष जगह से दवा खरीदने के लिए बाध्य करना ठीक नहीं है। ऐसी दवा लिखी जानी चाहिए, जिसे मरीज अपनी सुविधानुसार कहीं से भी खरीद सके। डाक्टरों को एथिकल के बजाय जेनेरिक नेम से ही दवाएं लिखनी चाहिए। ब्रांडेड में भी सस्ती दवाएं मरीजों को दी जाएं, ताकि इलाज उस पर बोझ न बने।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us