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बसपा में आते-जाते रहे कद्दावर नेता

Dehradun Bureau Updated Sun, 11 Nov 2018 12:01 AM IST
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हरिद्वार। कभी जिले में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी बहुजन समाज पार्टी के साथ एक अजीब फैक्टर यह भी जुड़ा हुआ है कि ज्यादा लंबे समय तक कोई भी जनाधार वाला नेता बसपा के साथ नहीं रह सका। कभी पार्टी ने नेताजी को बाहर का रास्ता दिखा दिया तो कभी नेताजी ने खुद ही पार्टी छोड़ दी।
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कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के सबसे विश्वासपात्र माने जाने वाले और बसपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद पाने वाले राज्यसभा के पूर्व सांसद ईसम सिंह को भी वर्ष 2007 के चुनावों के समय पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। दो बार इकबालपुर से बसपा के विधायक रहे यशवीर सिंह, मंगलौर से बसपा के दो बार विधायक रहे काजी निजामुद्दीन, तीन बार बसपा के विधायक रहे हरिदास और भगवानपुर से विधायक सुरेंद्र राकेश, ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सके। बहादराबाद विधानसभा क्षेत्र से दो बार बसपा के विधायक रहेे मोहम्मद शहजाद के लिए तो बसपा की राजनीति ऐसी साबित हुई कि उन्हें पार्टी से तीन बार बाहर का रास्ता देखना पड़ा। एक दौर तो ऐसा भी आया जो एक बार बसपा का प्रदेश अध्यक्ष बन गया वह बाद में पार्टी से बाहर ही कर दिया गया। इनमें चार बार प्रदेश अध्यक्ष रहे सूरजमल के साथ ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नत्थूसिंह, सतीश कुमार, सीपी सिंह के साथ ही दिग्गज नेता मेहर सिंह, भंवर सिंह , मदनलाल, समेत अन्य कई नेताओं के भी नाम शामिल हैं। अब सरवत करीम अंसारी का नाम भी ऐसे नेताओं की सूची में शामिल हो गया है। अधिकतर जनाधार वाले नेताओं के पार्टी से चले जाने का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। बसपा का संगठन वर्ष 2000 के मुकाबले इस समय काफी कमजोर दिख रहा है।

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