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नारसन, रुड़की और लक्सर के गंगा क्षेत्र तक बनें घाट

Dehradun Bureauदेहरादून ब्यूरो Updated Tue, 18 Jun 2019 11:28 PM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि कुंभ क्षेत्र का विस्तार पहाड़ों के बजाय नारसन तक किया जाए। समूचा हरिद्वार जनपद कुंभ मेला क्षेत्र में शामिल हो। जब सरकार कुंभ में आने वाले यात्रियों को रुड़की और लक्सर तक रोकने की योजना बना रही है, तब कुंभ क्षेत्र का विस्तार भी पूरे जनपद में होना चाहिए।
श्रीमंहत हरि गिरि ने इस बात आश्चर्य जताया कि उत्तराखंड सरकार बेवजह पहाड़ों को मेला क्षेत्र में शामिल कर हरिद्वार कुंभ बजट का दुरुपयोग करना चाहती है। कुंभ मेला न तो ऋषिकेश में लगता है और न देवप्रयाग में। कुंभ मेला क्षेत्र यदि पूरा हरिद्वार जनपद होगा तो रुड़की और नारसन के गंगा तटों पर भी घाटों का निर्माण कर आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान कराया जा सकता है। सरकार की मंशा है कि कुंभ में दस करोड़ यात्री आएं। हरि गिरि ने पूछा कि क्या अधिक यात्रियों को सरकार सैकड़ों किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग में स्नान कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को हास्यास्पद कामों से बाज आना चाहिए। शासन चाहता है कि अधिक भीड़ बढ़ने पर यात्रियों का रुड़की और लक्सर में ही रोक दिया जाए। उन्होंने पूछा कि तो क्या यात्री रुड़की से हरिद्वार पैदल आकर स्नान करेंगे। यदि उन्होंने रोकना है कि तो स्नान के लिए हरिद्वार-लक्सर रोड के उन सभी भागों में गंगा घाट बनाए जाएं, जहां गंगा बहती है। इसी प्रकार रुड़की तक लंबे घाट बनने चाहिए। हरि गिरि ने कहा कि पिछले कुंभ मेले में देवप्रयाग को तो मेला क्षेत्र में शामिल किया गया, जहां एक स्नानार्थी नहीं पहुंचा। लेकिन हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र के ज्वालापुर में कुंभ का एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया। यह अन्याय है।
सरकार की सुस्ती पर जताई नाराजगी
राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि उत्तराखंड सरकार सुस्ती से काम कर रही है। कुुंभ मेले के कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं और जुलाई से बरसात शुरू हो जाएगी। ऐसे में काम करना मुश्किल होगा। अगले वर्ष के बरसात के बाद मेले की पेशवाईयां निकलने लगेेंगी। उन्होंने कहा कि काम करने का वक्त निकला जा रहा है। हाल ही में प्रयाग अर्द्धकुंभ में योगी सरकार ने कुंभ से बड़े इंतजाम किए। उन्होंने केंद्र से लेकर 35 हजार करोड़ कुंभ में लगाए। हरिद्वार में तो सारा मेला ही गंगा के मैदान में बसाया जाना है। इतने कम समय में काम पूरे होने के कोई आसार दिखाई नहीं पड़ रहे।

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