ऐतिहासिक, सांस्कृतिक स्मारकों को नुकसान पहुंचेगा 

ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।   Updated Mon, 31 Jul 2017 11:30 PM IST
विज्ञापन
इसी पंचेश्वर में बांध बनेगा
इसी पंचेश्वर में बांध बनेगा - फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
चंपावत/पिथौरागढ़। जिले के पंचेश्वर में बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था पर भी भारी पड़ने वाली है। बांध निर्माण के अमलीजामा पहनने की सूरत में बड़ी संख्या में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक महत्व के स्मारकों को नुकसान पहुंचेगा।
विज्ञापन

भले ही बांध की डीपीआर बनाने से पहले बांध के निर्माण के परिणाम स्वरूप बने जलाशय में भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से अधिसूचित किसी भी स्मारक को न डुबाने की सहमति दी गई है लेकिन प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में करीब 89 मंदिरों के डूबने की संभावना है।
 इनमें पंचेश्वर, रामेश्वर, तालेश्वर में स्थित तीन प्रमुख मंदिर है। जो न केवल स्थानीय लोगों द्वारा बल्कि आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। तीनों मंदिर भगवान शिव के हैं। पंचेश्वर मंदिर सरयू, महाकाली नदी में प्रस्तावित बांध स्थल से करीब ढाई किमी की दूरी पर स्थित है।
बांध बनने की सूरत में यह मंदिर करीब 230 मीटर की गहराई में डूब जाएगा जबकि रामेश्वर में सरयू, रामगंगा नदी के संगम में स्थित शिव मंदिर के डूबने की गहराई 130 मीटर होगी। इसी प्रकार पिथौरागढ़ जिले में पड़ने वाले झूलाघाट से 10 किमी पहले तालेश्वर महादेव मंदिर के डूबने की गहराई करीब 250 मीटर तक होगी।

वाप्कोस कंपनी की ओर से पंचेश्वर, रामेश्वर, तालेश्वर महादेव मंदिरों को भी विस्थापित करने का प्रावधान डीपीआर में शामिल किया गया है। हालांकि बांध बनने के बाद इन मंदिरों के स्थल, निर्माण स्वरूप में परिवर्तन हो जाएगा। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के कुंवर सिंह प्रथोली, शंकर दत्त पांडेय, पुष्कर सिंह आदि का कहना है कि धार्मिक आस्था को अलग रख दिया जाए तो बांध के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधनों की बढ़ोतरी होगी। इस कारण क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण बांध परियोजना बनाए जाने के समर्थन में है।

प्रस्तावित डूब क्षेत्र में कोई भी खनिज भंडार नहीं
चंपावत। पंचेश्वर बांध की डीपीआर तैयार करने वाली कंपनी वाप्कोस के मुख्य प्रभारी अभियंता राहुल गौतम का कहना है कि बांध के प्रस्तावित डूब क्षेत्र में कोई भी खनिज भंडार नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से कराए गए व्यापक सर्वेक्षण में बांध परियोजना और इसके आसपास के क्षेत्रों बहुत कम या कोई खनिज भंडार नहीं है।

घास, पौधों की 193 प्रजातियां होंगी प्रभावित
चंपावत। वाप्कोस कंपनी के सर्वे के मुताबिक प्रस्तावित बांध परियोजना क्षेत्र में घास, पौधों की 193 प्रजातियां प्रभावित होंगी। इसमें 46 वृक्ष, 33 झाड़ियां, 53 जड़ी बूटियां, 11 क्लेमर्स, 29 घास, पांच नरकट, एक परजीवी प्रजातियां प्रभावित होंगी। जैवविविधता में शामिल स्तनधारी जंतु, पक्षी आदि जीव, जंतुओं की सैकड़ों प्रजातियां भी प्रभावित होंगी।

रिवर राफ्टिंग, साहसिक पर्यटन को लगेगी चोट
चंपावत। अब तक साहसिक पर्यटन, रिवर राफ्टिंग के लिए मुफीद समझी जाने वाली सरयू, महाकाली नदी में बांध बनने पर रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षण, साहसिक पर्यटन संबंधी प्रशिक्षणों के आयोजन पर चोट पहुंचेंगी। वर्तमान में कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से साहसिक खेलों, रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षणों के लिए घाट से पंचेश्वर तक सरयू नदी, उसके बाद पंचेश्वर से महाकाली नदी में टनकपुर के बूम तक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं।

 स्कंदपुराण में रामेेश्वर का वर्णन
 पिथौरागढ़। रामेेश्वर के मंदिर को भगवान राम द्वारा स्थापित बताया जाता है। इसका प्रमाण महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित स्कंदपुराण में मिलता है। स्कंदपुराण को उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों का प्रमाणिक ग्रंथ माना जाता है। स्कंदपुराण के मानसखंड के रामेेश्वर नामक 95वें अध्याय में पिथौरागढ़ से 36 किमी दूर गंगोलीहाट तहसील में सरयू, रामगंगा के संगम में स्थित पौराणिक शिव मंदिर का बखान इस तरह किया गया है-
तस्माद्दशगुणं पुण्यं पूज्य रामेेश्वरं स्मृतम
वैद्यनाथाच्छतगुणं सेतुबंधात्ततैव च
प्राप्यते मुनिशार्दुल पूज्य रामेेश्वरं हरम
येन रामेेश्वरो देव: सरयूसंगमे शुभे
अर्थात काशी विश्वनाथ के पूजन से दस गुना, वैद्यनाथ सेतुबंध रामेेश्वर की अपेक्षा सौ गुना अधिक फल रामेेश्वर के पूजन से मिलते हैं। रामेेश्वर मंदिर सरयू के संगम पर स्थित है। मानसखंड में भगवान राम के सरयू, रामेेश्वर के संगम से महाप्रयाण (स्वर्गारोहण) तक का वर्णन है। सरयू नदी को महर्षि वशिष्ठ, रामगंगा को भगवान परशुराम द्वारा प्रकाश में लाने का उल्लेख है। रामेेश्वर मंदिर, सरयू-रामेेश्वर संगम के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। इसी तरह तालेेश्वर के भगवान शंकर के मंदिर, पंचेेश्वर के चमू देवता के मंदिर को धामों की मान्यता है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us