एक्सक्लूसिव: सर्वे, डिजाइनिंग और डीपीआर में ही निकल गए 12 साल

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2020 10:33 PM IST
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मां पूर्णागिरि धाम की दरार वाली मुख्य मंदिर की चोटी।
मां पूर्णागिरि धाम की दरार वाली मुख्य मंदिर की चोटी। - फोटो : CHAMPAWAT

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चंपावत। जिले में स्थित सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मंदिर की चट्टानों में आईं दरारों की वजह से ऐतिहासिक मंदिर की सुरक्षा खतरे में है। इसके बावजूद पिछले 12 साल से इन दरारों को भरने (रेस्टोरेशन) की कवायद कागजों पर ही चल रही है। विडंबना यह है कि कई नामी परामर्शदाता एजेंसियों के सुझाव के बाद भी इस पर काम शुरू नहीं हो सका है। अब नई परामर्शदाता एजेंसी को सर्वे का जिम्मा सौंप कर एक माह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए एजेंसी ने ड्रोन से सर्वे की अनुमति मांगी है।
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वर्ष 2008 के बाद मुख्य मंदिर की पहाड़ी में कई जगह करीब पांच इंच चौड़ी दरारें आ गई थीं। शासन ने 2015 में उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट (यूडीआरपी) को इसके सर्वे का जिम्मा सौंपा और सर्वे कराया था। भूगर्भीय रिपोर्ट और परामर्शदाता एजेंसी के सुझाव पर 5500 फुट की ऊंचाई पर स्थित धाम की पहाड़ी की दरारों को भरने के साथ मुख्य मंदिर से 700 मीटर तक पैदल मार्ग की दो फुट की चौड़ाई को आठ फुट तक किया जाना था। इसके लिए शासन स्तर से राशि भी जारी की गई लेकिन, बेहद संकरा और अधिक गहराई की वजह से कोई भी ठेकेदार यहां काम करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
संवेदनशील है मंदिर की चोटी
पूर्णागिरि क्षेत्र का निरीक्षण कर चुके भूवैज्ञानिक डॉ. दीपक हटवाल ने बताया कि मां पूर्णागिरि मंदिर शिवालिक क्षेत्र में स्लेटी बलुआ पत्थरयुक्त चट्टानों पर स्थित है। ये चट्टानें आसानी से रेत के रूप में परिवर्तित हो सकती हैं। कमजोर चट्टानों के अलावा संधियुक्त होने से मंदिर की स्थिति संवेदनशील है।
64 शक्तिपीठों में एक है मां पूर्णागिरि धाम:
चंपावत। मां पूर्णागिरि देवी का धाम 64 सिद्धपीठों में से एक है। किवदंती है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री पार्वत (सती) ने अपने पति महादेव के अपमान के विरोध में दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ कुंड में स्वयं कूदकर प्राण आहूति दे दी थी। भगवान विष्णु ने महादेव के क्रोध को शांत करने के लिए सती पार्वती के शरीर के 64 टुकड़े किए थे। जहां-जहां ये टुकड़े गिरे, वहां एक शक्तिपीठ स्थापित हुआ। मां पूर्णागिरि पीठ में सती पार्वती की नाभि गिरी थी। कहा जाता है कि देवी दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- एक माह पूर्व दरार पाटने के लिए हुए टेंडर में एक ही ठेकेदार ने हिस्सा लिया और उसने निर्माण लागत से आठ प्रतिशत अधिक बोली लगाई। ऐसे में नीलामी निरस्त कर दी गई। अब फिर से नई परामर्शदाता एजेंसी से सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
-एससी आर्या, अधिशासी अभियंता विश्व बैंक निर्माण खंड।
-लाखों लोगों के आस्था के केंद्र मां पूर्णागिरि धाम की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए नवीनतम तकनीक के जरिये सुरक्षित तरीके से दरारों को पाटकर ही मंदिर को मजबूती दी जा सकती है। इस काम में मंदिर समिति पूरा सहयोग करेगी। - पंडित भुवन चंद्र पांडेय, अध्यक्ष, मां पूर्णागिरि मंदिर समिति।
-पुणे की परामर्शदाता एजेंसी सर्वे के लिए ड्रोन का उपयोग करना चाह रही है। इसके लिए उस एजेंसी को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही वह सर्वे करा सकती है। - हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर
ये परामर्शदाता एजेंसियां कर चुकीं हैं अब तक मुआयना
1- कर्नाटक के कोलार की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स।
2- ग्रीस की ओमी कारन कप्पा।
3- पुणे की जैनेस्ट्रो कंपनी।
4- गुरुग्राम की इंडस कंसल्टेंट कंपनी।
5- केंद्र जलशक्ति मंत्रालय की वॉप्कोस कंपनी।
भूविज्ञानियों के सुझाव
1. चट्टानों की दरारों में दबाव से सीमेंट मोर्टार भरा जाए।
2. सुरक्षा संबंधी काम और निर्माण में अभियांत्रिकी मार्गदर्शन लिया जाए।
3. मुख्य मंदिर में एक समय में न्यूनतम मानव गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं।
4. मंदिर के नीचे सैंडस्टोन चट्टानों में लोहे की जाली लगाकर दबाव से सीमेंट मोर्टार डाला जाए।
5. मंदिर के पास दरारयुक्त भाग से पेड़ों को हटाया जाए, ताकि पेड़ों की जड़ें दरारों की चौड़ाई न बढ़ा पाए।
6. मंदिर के नीचे उपलब्ध 10 मीटर गुना आठ मीटर भाग से स्टैप्स से आरसीसी की मजबूत धारक दीवार का निर्माण मंदिर के पास तक किया जाए।
7. धारक दीवार बनाने से पहले निचले स्तर पर आधार रखे जाने वाले भाग की भारग्राह्य क्षमता का आकलन करने के बाद ही डिजाइनिंग की जाए।
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