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बारहमासी रोड कटिंग से प्रभावित हो रहा पर्यावरण: एचपीसी

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Fri, 24 Jan 2020 10:42 PM IST
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निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग का पर्यावरणीय मुआयना करते उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष डॉ. डीवी सिंह
निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग का पर्यावरणीय मुआयना करते उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष डॉ. डीवी सिंह - फोटो : CHAMPAWAT
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सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गठित उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी (एचपीसी) ने शुक्रवार को निर्माणाधीन बारहमासी सड़क के चौड़ीकरण कार्य का मौका मुआयना किया।
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टीम ने निर्माण कार्य से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर कार्यदायी संस्था को चेताया है। टीम का कहना था कि कई जगह डंपिंग जोन से बाहर भी मलबा डाला गया है, जिससे पेड़ों व वनस्पतियों को क्षति पहुंच रही है। टीम ने 256 डंपिंग जोनों में से अब तक 71 डंपिंग जोनों के अलावा प्रस्तावित बाईपास का मुआयना किया। टीम शनिवार को 136 किमी लंबे इस मार्ग पर चंपावत से पिथौरागढ़ क्षेत्र का मुआयना करेगी।
डॉ. डीवी सिंह के नेतृत्व में आई एचपीसी की सात सदस्यीय टीम ने कटिंग से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर नाराजगी जताई। कटिंग के दौरान पहाड़ी में लटके पत्थरों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने के निर्देश दिए।
समिति ने कटिंग के बजाय खाई वाले हिस्से में दीवार निर्माण कर सड़क को चौड़ा करने को अधिक उपयुक्त बताया। कहा कि ऐसा करने से पर्यावरण की क्षति कम होती। समिति ने भूकटाव जोन और ऐसे संभावित क्षेत्रों की रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनाने की हिदायत दी।
स्वांला के पास खतरा बनी पहाड़ी की कटिंग में खास एहतियात बरतने के निर्देश दिए। सड़क चौड़ीकरण से पेयजल स्रोतों पर पड़ रहे प्रभाव का आंकलन भी किया। टीम ने निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की समस्याएं सुनीं। उप प्रभागीय वनाधिकारी एमएम भट्ट ने बताया कि पेड़ों को नुकसान पहुंचने पर कार्यदायी कंपनियों को कई नोटिस भेजे गए हैं।
ये रहे निरीक्षण के दौरान मौजूद
समिति के सदस्य डॉ. एससी कटियार, डॉ. एस सत्यकुमार, डॉ. एन बाला, डॉ. विक्रम गुप्ता, डॉ. हेमंत ध्यानी व अक्षय कुमार, अल्मोड़ा के वन संरक्षक प्रवीण कुमार, एसडीएम अनिल गर्ब्याल, एनएच के अधीक्षण अभियंता अनिल पांगती, अधिशासी अभियंता एलडी मथेला, एई एनसी पांडेय, एसडीओ एमएस सेमिया।
बारहमासी मार्ग के ये हैं चार पैकेज
1.टनकपुर-बेलखेत (40 किमी)
2.बेलखेत-चंपावत (38 किमी)
3.चंपावत-च्यूरानी (27 किमी)
4.च्यूरानी-पिथौरागढ़ (31 किमी)
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