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आसान नहीं एड्स के खिलाफ जंग!

Champawat Updated Mon, 01 Dec 2014 05:31 AM IST
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चंपावत। एड्स अथवा एचआईवी की दहशत में कमी आई, लेकिन इनके खतरे कम नहीं हुए हैं। एक दशक में जिले भर में 28 लोगों की मौत हो चुकी है। चंपावत जिले में तो इस रोग से लड़ने के हथियार ही आधे-अधूरे है। जिला मुख्यालय में एचआईवी जांच की सुविधा तक नहीं है। इसकी वजह यहां स्वैच्छिक परामर्श एवं परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) का नहीं होना है।
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एड्स नियंत्रण के जिला कार्यक्रम समन्वयक दुर्गेश सिंह का कहना है कि इस साल अब तक जिले के दोनों आईसीटीसी केंद्रों में 3400 लोगों का परीक्षण हुआ, जिसमें 12 लोग एचआईवी पाजिटिव पाए गए। दो लोगों को एंटी रिट्रावायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) केंद्र हल्द्वानी रेफर कि या गया, जबकि एक व्यक्ति की मौत हुई। समन्वयक के मुताबिक जिले में 2004 से एड्स नियंत्रण कार्यक्रम शुरू हुआ। तबसे यहां कई ऐसी खामियां हैं, जो एड्स के खिलाफ लड़ाई को कमजोर बनाती हैं। एचआईवी के परीक्षण का आईसीटीसी केंद्र जिला मुख्यालय में नहीं होने से लोगों को परीक्षण के लिए 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट में जाने की मजबूरी है। जिले में आईसीटीसी लोहाघाट के अलावा टनकपुर में है। चंपावत में लैब तकनीशियन नहीं होने से रक्त की जांच नहीं हो पा रही है।

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