कब तक उपेक्षित हाल में रहेंगे पर्यटन स्थल?

Champawat Updated Mon, 01 Dec 2014 05:31 AM IST
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चंपावत। जिले में कई पर्यटन स्थल प्रशासनिक अनदेखी के चलते उपेक्षित हाल में हैं। यहां विभिन्न राजवंशों से जुड़े और आजादी के दौर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की भरमार होने के बाद भी पर्यटकों की आमद बेहद सीमित है। मत्स्य आखेट और रिवर राफ़्ंटग से विश्व पर्यटन मानचित्र में स्थान बनाने वाले पंचेश्वर जैसे महत्वपूर्ण स्थल भी पर्यटकों को यहां बुलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। खस्ताहाल सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों में पर्यटकों की आवाजाही बेहद कम है।
इतिहासकार देवेंद्र ओली का कहना है कि जिले के खेतीखान में आजादी के दौर में 1934 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री समेत कई दिग्गज सेनानी रहे थे, मगर इस स्थान को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास नहीं किए गए। दूसरी ओर जानकारी के अभाव में कुमाऊं में रेल स्टेशन से सबसे कम दूरी वाला श्यामलाताल सरोवर भी पर्यटकों की नजरों से ओझल है। इस संबंध में डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि एनएच की दशा सुधारने के लिए सीमा सड़क संगठन के बजाए लोनिवि को कार्यदायी संस्था बनाया जा रहा है।

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