रीता, अंजू और करुणा ने पेश की मिसाल

Champawat Updated Sat, 25 Jan 2014 05:53 AM IST
लोहाघाट। राज्य आंदोलनकारी स्व. हीराबल्लभ गहतोड़ी की तीनों पुत्रियों ने पुत्र की तरह पिता के अंतिम संस्कार के समय अर्थी को कंधा दिया। वहीं उन्होंने चिता को भी मुखाग्नि देने के साथ वर्ष भर तक बेटे द्वारा जो भी क्रियाकर्म किया जाता था, उसे निभाया। तीनों बहिनों ने उन लोगों के लिए समाज में यह संदेश दिया कि बेटियां भी बेटों की तरह माता-पिता की सेवा करने के साथ मरने के बाद उनका क्रियाकर्म भी कर सकती हैं।
स्व. गहतोड़ी की बड़ी पुत्री रीता गहतोड़ी ने माता-पिता की सेवा के लिए विवाह न करने और बेटियों को बचाने के लिए सामाजिक जागरूकता पैदा करने का संकल्प लिया है। इस कार्य में उनकी बहिन अंजू भी सहयोग कर रही हैं। तीसरी विवाहिता बहिन करुणा और उनके पति कमलेश भट्ट की ओर से प्राथमिक विद्यालय ढोरजा में 21 बालिकाओं को प्रतिमाह 50 रुपये प्रत्येक को छात्रवृत्ति दी जा रही है। इन बालिकाओं की मां हरिप्रिया गहतोड़ी का कहना है कि उन्हें बेटा न होने का कोई मलाल नहीं है। इतनी सेवा तो बेटा भी नहीं करता। रीता को इस वर्ष तीलू रौतेली महिला राज्य महिला शक्ति पुरस्कार के लिए चुना गया है। अमर उजाला की ओर से संचालित बेटी ही बचाएगी मुहिम को रीता ने घर घर पहुंचाकर लोगों को बेटी बचाने के लिए प्रेरित किया है।

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