मौसम का असर: स्थानीय बाजार से गडेरी गायब

Champawat Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
चंपावत। मानसून सीजन में कम बारिश का असर यहां सब्जी उत्पादन पर भी पड़ा है। इस बार स्थानीय बाजार में गडेरी की कमी अभी से होने लगी है, जबकि पिछले साल तक बाजार में गडेरी (अरबी) बड़ी मात्रा में बाजार में आ जाती थी। काश्तकारों ने बताया कि इस बार जून के अंत तक बारिश न होने के कारण गडेरी के पौधे खेतों में ही सूखने लगे थे। जुलाई प्रथम सप्ताह से मानसून की बारिश शुरू तो हुई, लेकिन उसकी गति कम रही।
चंपावत के आसपास के गांवों के अलावा चल्थी, सूखीढांग में गडेरी का अच्छा उत्पादन होता है। किसान हर साल हजारों रुपये का कारोबार करते हैं। अक्तूबर के अंत से गडेरी बिकने को आ जाती है और दिसंबर तक यह बाजार में उपलब्ध रहती है, लेकिन इस बार नवंबर से ही गडेरी का अभाव हो गया है। गडेरी ठीक आलू की तरह जमीन के अंदर पैदा होने वाली सब्जी है। स्वादिष्ट तथा पौष्टिक होने के कारण इसकी भारी मांग रहती है। इस बार बाजार में गडेरी की कम आवक होने के कारण शुरू से ही दाम 20 रुपये किलो तक पहुंच गए। कुछ दिनों तक बाजार में उपलब्ध होने के बाद गडेरी अचानक गायब हो गई। कुछ लोगों का कहना है कि मैदानी शहरों से ज्यादा मांग आ जाने के कारण किसानों ने सीधे इसे मैदान की मंडियों में भेजना शुरू कर दिया है। जबकि कुछ लोग मानते हैं कि कम उत्पादन के कारण अभाव की स्थिति आ गई है।
कृषि वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि गडेरी के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इस बार चंपावत में मानसून की बारिश औसत से 27 फीसदी कम होने से सब्जी उत्पादन पर असर पड़ा है। वह मानते हैं कि गडेरी का उत्पादन 40 प्रतिशत तक कम हुआ है।

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