बारह वर्षों में भी पूरा नहीं हुआ चिह्नीकरण

Champawat Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
लोहाघाट। राज्य स्थापना के 12 वर्ष पूरे होने के बावजूद भी चंपावत जिले में राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण का कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जिसको लेकर आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। हालांकि कुमांऊ में चंपावत ऐसा जिला था, जहां राज्य आंदोलन का संघर्ष नगर से ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला हुआ था। यहां हर उम्र के लोग आंदोलन में योद्धा बने हुए थे। इनमें से अभी तक जिला प्रशासन ने केवल 210 लोगों को राज्य आंदोलनकारी घोषित किया है, जबकि 39 आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी तथा सात लोगों को मासिक पेंशन से जोड़ा गया है।
राज्य बनने के बाद जिले के ऐसे तमाम प्रमुख लोगों को राज्य आंदोलनकारी चिह्नित किए जाने से वंचित किया गया हैं, जिनकी आंदोलन में महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। आंदोलन के दौरान उत्तराखंड स्टूडेंट फेडरेशन के अध्यक्ष एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रमेश देव, खेतीखान के हरिकृष्ण ओली, कानाकोट के प्रेमबल्लभ आदि लोगों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जिन लोगों को राज्य आंदोलनकारी घोषित किया गया है, उसमें से तमाम ऐसे लोग हैं, जिनका राज्य आंदोलन से दूर का वास्ता नहीं था।

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