द्वितीय विश्व युद्ध के समय दो वर्ष तक नहीं हो सकी रामलीला

Champawat Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
चंपावत। चंपावत की आदर्श रामलीला मल्लीहाट को 112 वर्ष पूरे हो गए हैं। इतने लंबे अंतराल में रामलीला मंचन में सिर्फ दो बार व्यवधान आया। द्वितीय विश्व युद्ध के समय 1942 में पेट्रोमैक्स जलाने के लिए केरोसिन न मिल पाने के कारण दो वर्ष तक रामलीला को स्थगित रखा गया था। केरोसिन प्राप्त करने के लिए अनुमति अल्मोड़ा से लेनी पड़ती थी लेकिन तब उसकी अनुमति नहीं मिल पाई। 1944 में जब केरोसिन मिलने लगा तभी रामलीला का विधिवत मंचन फिर से शुरू हो गया। तब से यह लगातार जारी है। हर वर्ष रामलीला के मंचन को नया स्वरूप मिलता गया। अब तो रामलीला में ध्वनि और प्रकाश की बेहतरीन व्यवस्था रहती है। मंच की सजावट पर खास ध्यान दिया जाता है। कलाकारों को गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। उसे अभिनय और गायन की बारीकी समझाई जाती है।
चंपावत नगर के कुछ जागरूक लोगों ने वर्ष 1900 में रामलीला मंचन का श्रीगणेश किया था। रुद्रलाल साह प्रथम व्यवस्थापक रहे। बाद में नाथ लाल साह को यह दायित्व मिला। नाथ लाल 1940 में नैनीताल से पेट्रोमैक्स खरीदकर ले आए। तब तक बड़े दीयों में रुई भरकर रोशनी की जाती थी। कुछ समय बाद व्यवस्थापक का काम नाथ लाल जी के बेटे नारायण लाल साह ने संभाला। चंपावत की रामलीला की खासियत यह थी कि कुछ कलाकारों को अभिनय देखने के लिए ही दर्शक दूर-दूर से पहुंचते थे। चाराल पट्टी के अलावा ललुवापानी. खटोली, स्वाला, धौन, सीमांत तामली क्षेत्र से लोग मशाल जलाकर टोलियों में रामलीला देखने आते थे। ज्यादा दूर के लोग तो रात में चंपावत में ही रुक जाते थे।
रामलीला के व्यवस्थापक रहे नारायण लाल साह का कहना है कि वर्ष 1899 में प्रेम लाल वर्मा भीमताल से रामलीला की किताब लेकर आए थे। उसी किताब के आधार पर 1900 से यहां मंचन शुरू किया गया। रामलीला के कुछ पुराने कलाकारों को लोग आज भी याद करते हैं। इनमें जनक और सुलोचना के पात्र लक्ष्मी दत्त राय, रावण के पात्र मथुरादत्त तिवारी और महेश तड़ागी, दशरथ के पात्र नारायण दत्त पचौली, हनुमान के पात्र देव सिंह अधिकारी, सूर्पनखा के पात्र भुवन तड़ागी, आलराउंडर कलाकार जगदीश चंद्र पचौली शामिल हैं। जब इन कलाकारों का अभिनय होता था तब दूर-दूर से लोग यहां पहुंच जाते थे।


कलाकारों को दिया जा रहा गहन प्रशिक्षण
चंपावत। आदर्श रामलीला कमेटी मल्लीहाट के वर्तमान संरक्षक भगवतशरण राय का कहना है कि रामलीला के कलाकारों को इस बार गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मुकेश तड़ागी, व्यवस्थापक सौरभ साह आदि व्यवस्था को बनाने में जुटे हैं। 16 अक्तूबर से शुरू होने वाली रामलीला के कलाकारों को भुवन चंद्र पचौली, दीपक तड़ागी आदि प्रशिक्षण दे रहे हैं। श्री राय का कहना है कि रामलीला में इस बार ध्वनि और प्रकाश की विशेष व्यवस्था रहेगी।

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