वास्तविक आंदोलनकारियों की अनदेखी का आरोप

Champawat Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
लोहाघाट। राज्य आंदोलनकारियों ने शासन और प्रशासन पर वास्तविक आंदोलनकारियाें की अनदेखी का आरोप लगाया है और जिला प्रशाशन की ओर से चिह्नीकरण के लिए गठित समिति की कार्यप्रणाली पर अफसोस जाहिर किया है।
रविवार को रामलीला मैदान में आयोजित बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से आए राज्य आंदोलनकारियों का कहना था कि उन्होंने राज्य आंदोलन की लड़ाई सम्मान या प्रमाण पत्र पाने के लिए नहीं बल्कि उत्तराखंड के लोगों के व्यापक हितों को देखते हुए लड़ी थी। सरकार द्वारा ही आंदोलनकारियों को सम्मान देने का निर्णय लिया गया, जिसका दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह रहा कि वास्तविक आंदोलनकारियों को तो वंचित रख दिया गया और राज्य आंदोलन का विरोध करने वाले चेहरे आंदोलनकारियों की सूची में आ गए।
प्रमुख राज्य आंदोलनकारी पीएस मेहता की अध्यक्षता और खीम सिंह पाटनी के संचालन में हुई बैठक में ललित गहतोड़ी, दयानंद सोराड़ी, नरेंद्र गहतोड़ी, सुनील गोस्वामी, दीपक राय, तेज सिंह बिष्ट आदि का कहना था कि सरकार द्वारा चिह्नीकरण में की जा रही देरी से आंदोलनकारी अपने को अपमानित महसूस कर रहे हैं। तय किया गया कि शीघ्र ही जिला मुख्यालय में चिह्नीकरण से वंचित सभी आंदोलनकारी व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।

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