अशांत हो रही शांत वादियां

Champawat Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
चंपावत। पहाड़ के अन्य जिलों की तरह चंपावत में भी अपराध ने अलग-अलग स्वरूप में पांव पसारने शुरू किए हैं। 2003 में 15 वर्षीय बालिका की दुराचार के बाद हत्या की बात आज भी लोगों के जेहन में कौंधती है। हाल के वर्षों में चोरी, लूट, हत्या के कई मामले प्रकाश में तो आए, लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों में पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। कई छोटे मोटे मामले तो ऐसे हैं, जिनमें पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने तक की जरूरत नहीं समझती। किसी समय में शांत माने जाने वाले चंपावत में भी अब अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।
चोरी की घटनाएं ज्यादा
-अगस्त 2011 में सेलागाड़ में महिला के कर्णफूल की लूट, इसमें पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया था।
-अक्तूबर 2011 में जिला कार्यक्रम अधिकारी के पूल्ड आवास स्थित घर से नकबजनी, लाखों के कीमती आभूषण चोरी, मामले का अब तक खुलासा नहीं।
-नवंबर 2011 में जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर नरसिंहडांडा में दुकान तोड़कर चोरी, पुलिस ने मामला ही दर्ज नहीं किया।
-मई 2012 जिला मुख्यालय के समीप ढकना गांव में दिनदहाड़े महिला का कर्णफूल लूटा, आरोपी अब तक पकड़ में नहीं।
-मई 2012 में जिला मुख्यालय के व्यस्ततम जीआईसी चौक में दुकान से लैपटाप चोरी, अब तक मामले का खुलासा नहीं।
अपराधों के नजरिए से मैदानी क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील
-29 अप्रैल 2012 को कार्की फार्म निवासी महेशानंद तथा राजेंद्र सिंह राजपूत के घर में चोरी, कोई खुलासा नहीं।
-10 मई 2012 को सर्राफा व्यवसायी संजय सर्राफ से लाखों के आभूषणों की ठगी, आरोपी पकड़ से बाहर।
-19 मई 2012 को नौगवांनाथ चकरपुर निवासी व्यापार कर विभाग के कर्मचारी प्रताप सिंह के खाते से जालसाजों ने 1.80 लाख उड़ाए, अब तक आरोपी पकड़ से बाहर।
-22 मई 2012 को पूर्णागिरि मेले से शाहजहांपुर निवासी 13 वर्षीया किशोरी प्रियंका रहस्यमय ढंग से लापता, अब तक नहीं चला पता।
-26 मई 2012 को विष्णुपुरी कालोनी निवासी दीपक भट्ट के मकान में चोरी, कोई भी खुलासा नहीं।
-26 मई 2012 को जालसाजों ने एसबीआई के एटीएम से पचोरिया चकरपुर निवासी देव सिंह धामी के खाते से 6 लाख उड़ाए, कोई खुलासा नहीं।
-27 जून 2012 को सूखीढांग क्षेत्र में अज्ञात किशोरी की गला दबा कर हत्या, अब तक न तो शिनाख्त हुई न आरोपी पकड़ा गया।
लोहाघाट में जालसाज सक्रिय
-मई 2012 में जालसाजों ने एटीएम से स्थानीय व्यक्ति के 30 हजार रुपये उड़ा लिए। अब तक जालसाज का पता नहीं।
बाक्स
छानबीन का सिर्फ नाटक
चंपावत। जनदबाव के चलते पुलिस रिपोर्ट तो दर्ज कर लेती है। कुछ दिन तक छानबीन का नाटक होता है। उसके बाद घटना को लोग भी भूल जाते हैं और पुलिस भी ढीली पड़ जाती है। अधिकांश मामलों का खुलासा न होने के पीछे यही मुख्य कारण रहे हैं। कई मामले तो ऐसे होते हैं जिनमें पुलिस मामला तक दर्ज नहीं करती। ऐसा कहा जाता है कि अपना रिकार्ड सुधारने के लिए पुलिस अपराधों को दर्ज करने से बचती है। ऐसा अन्य स्थानों पर भी होता आया है।

Spotlight

Most Read

National

पुरुष के वेश में करती थी लूटपाट, गिरफ्तारी के बाद सुलझे नौ मामले

महिला लड़कों के ड्रेस में लूटपाट को अंजाम देती थी। अपने चेहरे को ढंकने के लिए वह मुंह पर कपड़ा बांधती थी और फिर गॉगल्स लगा लेती थी।

20 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO : गैस सिलेंडर में आग लगने पर न घबराएं, अपनाएं ये उपाय

उत्तराखंड के लोहाघाट में फायर ब्रिगेड कर्मियों ने अग्नि सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान का शुभारंभ लोहाघाट के भीड़ वाले स्टेशन बाजार से किया गया।

9 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper