अंग्रेजों की नाक में दम किया था शास्त्री ने

Champawat Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंपावत। लंबे समय तक कुमाऊं की राजनीति का केंद्र बिंदु रहे चंपावत जिले का योगदान देश की आजादी की लड़ाई में भी किसी से कम नहीं है। इस छोटे से इलाके के सेनानियों ने अपने बहादुरी भरे कारनामों से सीमावर्ती जिले का मस्तक ऊंचा किया है। अपने शौर्य से देशभक्तों में जोश का संचार पैदा करने वाले इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से जिले में वर्तमान में एकमात्र सेनानी घनश्याम शास्त्री ही जीवित हैं। जिले के पाटी विकासखंड के किमाड़ गांव निवासी शास्त्री ने जहां लंबे समय तक जेल की कठोर यातना सही हैं, वहीं इस देशभक्त सेनानी को अंग्रेजों ने मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन वह हर बार अंग्रेजी पुलिस को चकमा देकर फरार होते रहे। इन्होंने देश को आजादी मिलने से पूर्व पांच वर्षों तक जंगलों और कंदराओं से स्वाधीनता की लड़ाई का संचालन कर अंग्रेजी शासकों की नाक में दम किया।
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करीब तीन वर्ष पूर्व पंचतत्व में विलीन हुए बनबसा निवासी कै.करम चंद का ताल्लुक आजाद हिंद फौज (आईएनए) से भी रहा है। तीन दशक तक सेना में सेवा करने वाले कै.करम चंद ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में दुश्मन के दांत खट्टे किए। इसी तरह पाटी ब्लाक के जनकांडे गांव के गुमान सिंह ने ब्रितानी फौजी के रूप में दूसरे महायुद्ध में हिस्सा लिया। बाराकोट ब्लाक के पट्यूड़ा गांव में जन्मे गणेश सिंह ने भी आजाद हिंद फौज के जरिए देश की स्वाधीनता की लड़ाई में योगदान किया। इसके अलावा स्वतंत्रता के महायज्ञ में डेढ़ दर्जन से ज्यादा और सेनानियों ने भी आहूति दी। जो अब इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन चुके हैं।
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