स्कूलों के उच्चीकरण में मानक रखे ताक पर

Champawat Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंपावत। ये आदेश सूबे के हुक्मरानों और अधिकारियों के काम करने के नजरिए और गंभीरता को दर्शाता है। स्कूलों के उच्चीकरण करने में मानकों को ताक पर रखा गया है। शिक्षा विभाग को जारी एक शासनादेश में ऐसे विद्यालय का उच्चीकरण कर दिया गया है जो मौजूद ही नहीं है। यही नहीं जिले के एक प्राथमिक विद्यालय को हाईस्कूल का दर्जा दे दिया गया है।
अगस्त 2011 में तत्कालीन अपर सचिव की ओर से चंपावत जिले के पांच हाईस्कूलों को इंटरमीडिएट एवं सात जूनियर हाईस्कूलों को हाईस्कूल में उच्चीकृत करने का शासनादेश जारी किया गया। जिले में जूनियर हाईस्कूल मंच और दुबचौड़ा, गैंडाखाली हाईस्कूल, रीठाखाल हाईस्कूल तथा मैरोली जूनियर हाईस्कूल को इंटरमीडिएट का दर्जा दिया गया लेकिन सहायता प्राप्त मैरोली जूनियर हाईस्कूल को उच्चीकरण से पूर्व हाईस्कूल का प्रांतीयकरण किया जाना जरूरी था। जबकि शासनादेश में इस तथ्य को नजरअंदाज किया गया है। इसी तर्ज पर सात जूनियर हाईस्कूल को हाईस्कूल का दर्जा दिया गया है। जिनमें गर्सलेख, तिमलागूंठ, नरसिंहडांडा, कलीगांव, कालाकोट, चूलागांव एवं नेत्रसलान शामिल हैं।
लापरवाही का आलम यह है कि शासनादेश में वर्णित जूनियर हाईस्कूल गर्सलेख अस्तित्व में है ही नहीं। जिस कलीगांव को जूनियर हाईस्कूल दर्शाया गया है वह असलियत में प्राथमिक विद्यालय है। मानकों के हिसाब से प्राथमिक विद्यालय का उच्चीकरण हाईस्कूल में हो ही नहीं सकता। आदेश में कहा गया है कि वित्त विभाग की अनुमति के बाद ही इन स्कूलों में पद सृजित किए जाएंगे। साथ ही 2011-12 से ही शिक्षा सत्र शुरू करने के आदेश हैं। आदेश में कहा गया है कि पद सृजन नहीं होने तक नई कक्षाओं का संचालन मौजूदा स्टाफ ही करेगा। इन स्कूलों में नई कक्षाओं का संचालन सितंबर 2011 से शुरू हो गया। यहीं वजह है कि इन स्कूलों में एक शिक्षा सत्र बिना शिक्षकों के ही पूरा हो गया। साफ है कि पद सृजित नहीं होने से छात्रों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
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