मानेश्वर क्षेत्र में मवेशीखोर बाघ का आतंक

Champawat Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंपावत। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती मानेश्वर क्षेत्र में इन दिनों मवेशीखोर बाघ का आतंक छाया हुआ है। मंगलवार की सुबह बाघ ने राष्ट्रीय राजमार्ग में एक बैल पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि मवेशीखोर बाघ दिन में भी दिखाई दे रहा है, जिससे स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे पूर्व भी बाघ की ओर से पशुओं में हमला किए जाने की वारदातें हो चुकी हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने वन विभाग से मवेशीखोर बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग उठाई है।
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मंगलवार को मानेश्वर में किशोर जोशी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों का कहना था कि मवेशीखोर बाघ के खौफ के कारण लमाई, भरछाना, तिलोन, राजपुरा, चौड़ा, मझेड़ा, कफलेख, खेतीगाढ़ आदि के गांवों में दहशत का माहौल है। बाघ इससे पूर्व भी कई कुत्तों एवं बकरियों को अपना निवाला बना चुका है। अब बाघ के दिन दहाड़े ही दिखाई देने से किसी अनहोनी की आशंका बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीण हरीश चंद्र, विजय कुमार, राजेश चंद्र, भूपेंद्र कुमार आदि ने मवेशीखोर बाघ के आदमखोर बाघ बनने से पूर्व उसे पिंजड़े में कैद करने की मांग उठाई है। जानकारों के अनुसार वनों में शिकार की कमी के चलते बाघ अक्सर मानव बस्तियों का रुख करते हैं।
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