लंबा है महिलाओं के शराब विरोध का इतिहास

Champawat Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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लोहाघाट। शराब के विरोध में कालीकुमांऊ की महिलाओं के संघर्ष का लंबा इतिहास है। पिछले दो दशक के दौरान पाटी, खेतीखान, बर्दाखान, काकड़, अमोड़ी आदि कई स्थानों में महिलाओं के जबरदस्त विरोध के कारण जिला प्रशासन को वहां से शराब का ठेका हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पहाड़ के शांत वातावरण में रहने वाली महिलाओं का सड़कों में निकलकर आक्रोश जताने का कोई नेताओं जैसा शौक नहीं है, लेकिन शराब के कारण जिस हिसाब से महिलाओं के सुहाग उजड़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए उनका सड़कों में निकलकर आक्रोश जताना उनके वास्तविक दर्द को अभिव्यक्त करता है।
खेतीखान में शराब भट्ठी ने जब वहां के सामाजिक तानेबाने को झकझोर कर रख दिया, तब यहां की महिलाओं ने उग्र आंदोलन छेड़कर शराब के ठेकेदार को अपना बोरिया बिस्तर बांधने को मजबूर कर दिया। पूर्व में विधायक पूरन सिंह फर्त्याल के नेतृत्व में शराब विरोधी आंदोलन से कई स्थानों में शराब के ठेकेदारों को अपना बोरिया बिस्तर समेटने के लिए विवश होना पड़ा है। यहां की महिलाओं की जागरूकता के अन्य स्थानों में उदाहरण दिए जाते हैं। पाटी, लोहाघाट एवं बाराकोट ब्लाकों में महिला समाख्या की गतिविधियां शुरू होेने के बाद चूड़ी वाले हाथ काफी सशक्त एवं धारदार बन गए हैं। गत वर्ष पाटी से शराब का ठेका हटाने में महिला आंदोलन की ही महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। महिला समाख्या द्वारा गांव-गांव में गठित संगज्यू संगठन से जुड़ी महिलाएं शराब के विरोध में मुट्ठी की तरह बंधी हुई हैं।

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