मुसीबत बन गए विद्युत लाइनों के पास खड़े पेड़

Champawat Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंपावत। पिथौरागढ़ से चंपावत तक बिछाई गई 75 किलोमीटर लंबी बिजली की लाइन के आसपास स्थित पेड़ों की टहनियों की नियमित छंटाई (लॉपिंग) के बावजूद अंधड़ के समय पेड़ गिरने से लाइनों के क्षतिग्रस्त होने का क्रम बंद नहीं हुआ है। अब तो यह समस्या और ज्यादा गंभीर होती जा रही है। पिछले सप्ताह आए तेज अंधड़ के कारण पेड़ टूटने से बिजली की लाइन को व्यापक नुकसान पहुंचा था और चंपावत जिले के पहाड़ी हिस्से में लोगों को पूरे 35 घंटे बगैर बिजली के गुजारने पड़े थे।
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विद्युत विभाग ने यह व्यवस्था की है कि हर साल अक्तूबर और अप्रैल में बिजली की हाईटेंशन लाइन से एक मीटर की दूरी पर पड़ने वाले पेड़ों की टहनियों को हटाया जाए। लाइन के लिए खतरनाक बनी पेड़ों की टहनियों को हटाने के लिए विद्युत विभाग को वन विभाग से अनुमति की जरूरत नहीं रहती। इसकी वजह यह है कि विभाग लॉपिंग के समय हरे पेड़ों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता। विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय अंचल में बिजली की लाइनें जंगलों से होकर गुजरती हैं, इस कारण वर्ष में दो बार लाइन के लिए खतरनाक साबित हो रही टहनियों को हटाने का काम किया जाता है। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता सीएस बस्नेत ने बताया कि लॉपिंग का काम नियमित रूप से किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने बाकायदा अलग से शेड्यूल भी तय कर रखा है।
इसके बावजूद अक्सर हल्के अंधड़ और तूफान के समय लाइनों में पेड़ गिरने और बिजली व्यवस्था में बाधा पहुंचने का क्रम थमा नहीं है। बताया गया है कि पिथौरागढ़ से चंपावत तक बिछाई गई 75 किलोमीटर लंबी 66 केवी की बिजली लाइन के आसपास कम से कम 100 पेड़ ऐसी स्थिति में हैं, जो कभी भी लाइन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन पेड़ों को काटने के लिए विद्युत विभाग को वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। इस प्रक्रिया में ज्यादा पेचीदगी होने के कारण खतरनाक पेड़ों को काटने का प्रस्ताव तैयार ही नहीं किया जाता।
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