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पांच सालों में हासिल नहीं हो सका साक्षरता का लक्ष्य

Haldwani Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 10:28 PM IST
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पांच सालों में हासिल नहीं हो सका साक्षरता का लक्ष्य
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चंपावत। जिले में भारत साक्षर मिशन के तहत केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए लक्ष्य को बीते पांच सालों में हासिल नहीं किया जा सका है। मिशन के तहत चलाए जाने वाले लोक साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले की 289 ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना करने के साथ ही उनमें प्रेरक और वरिष्ठ प्रेरकों की तैनाती की गई है। भारत सरकार की ओर से वर्ष 2012 से अगस्त 2016 तक जिले में 38632 निरक्षर महिला-पुरुषों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अब तक केवल 27181 निरक्षरों को ही साक्षर बनाया जा सका है। साक्षर होने वालों में 21700 महिलाएं और 5481 पुरुष शामिल हैं। बीते पांच वर्षों में पुरुषों की तुलना में चार गुना अधिक महिलाएं साक्षर हुई हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक सत्यनारायण के अनुसार साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम का संचालन जुलाई 2010 से किया जा रहा है। प्रदेश के टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, बागेश्वर, चंपावत, ऊधमसिंह नगर जिलों के 2731 ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्र संचालित हो रहे हैं। पिछले सात वर्ष से चल रही महत्वाकांक्षी योजना का मकसद निरक्षरों को साक्षर करना तथा उनकी समय-समय पर दक्षता परीक्षा कराना है। वर्ष 2012 में 5872 महिलाओं और 1447 पुरुषों को साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण कराई गई। इसी प्रकार 2013 में 4333 महिलाएं और 1474 पुरुषों, वर्ष 2014 में 3182 महिलाओं और 780 पुरुषों, 2015 में 2732 महिलाओं और 625 पुरुषों और वर्ष 2016 में 1408 महिलाओं सहित 450 पुरुषों को साक्षर बनाया गया है।

विकासखंड लोक शिक्षा केंद्र (लक्ष्य) संचालित केंद्र प्रेरकों की संख्या
बाराकोट 47 47 94
चंपावत 98 89 196
लोहाघाट 65 65 130
पाटी 79 78 156
कुल 289 278 558

छह जिलों के साक्षरता केंद्रों में तैनात है 5662 प्रेरक
चंपावत। प्रदेश के छह जिलों के लोक साक्षरता केंद्रों में 5662 प्रेरक कार्यरत हैं। जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी के अनुसार लोक साक्षरता केंद्रों में तैनात प्रेरकों को इस समय मात्र दो हजार रुपये मासिक मानदेय मिल रहा है, जिसमें हाल ही में राज्य सरकार की ओर से एक हजार रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। प्रेरकों की ओर से उनको राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय की राशि को वेतन में बदलने, प्रेरकों को भविष्य निधि, दुर्घटना बीमा, आश्रित कोटा, फंड और बोनस का लाभ दिए जाने की मांगे उठाई जाती रही हैं।

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